बिलावर। जब देश शिक्षा के डिजिटल युग में कदम बढ़ा रहा है, तब बिलावर के जखनु गांव में एक मिडिल स्कूल आज भी 20 साल पुराने जर्जर टिन शेड के नीचे बच्चों के सपनों को आकार देने की कोशिश कर रहा है।
यह स्कूल सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि 120 बच्चों की उम्मीदों का ठिकाना है, जो हर दिन रिसती छतों और टूटती दीवारों के बीच भविष्य की तलाश में आते हैं। स्कूल में कुल तीन कमरे हैं। एक में हेडमास्टर का कार्यालय है और बाकी दो कमरों में पहली से आठवीं तक की सभी कक्षाएं एक साथ चलती हैं। बरसात के दिनों में जब टिन की छत से पानी टपकता है तो बच्चों की किताबें भीग जाती हैं और कई बार स्कूल बंद करना पड़ता है। अभिभावक नेक राम ने बताया कि बच्चे भीगते हैं, लेकिन पढ़ाई नहीं छोड़ते। यही जज्बा है जो हमें मजबूर करता है कि हम आवाज उठाएं।
पूर्व ब्लॉक चेयरमैन निशा ठाकुर ने भी चिंता जताई कि स्कूल की चहारदीवारी तक नहीं है, जिससे सुरक्षा का भी संकट बना रहता है। कहा कि यह सिर्फ एक इमारत नहीं, बच्चों की ज़िंदगी है। सरकार को इसे प्राथमिकता देनी चाहिए। इन बच्चों की आंखों में सपने हैं, डॉक्टर, शिक्षक, देश की सेवा करने के, लेकिन जब हर बारिश उनके स्कूल की दीवारों को और कमजोर कर देती है, तो ये सपने भी भीगने लगते हैं। कहने को तो स्कूल मिडिल है, आठवीं तक कक्षाएं लगती हैं लेकिन कमरे तीन ही हैं। प्रशासन के भरोसे नया कमरा तो मिल जाएगा। यह एक उम्मीद की किरण है, लेकिन गांव वाले चाहते हैं कि सिर्फ एक कमरा नहीं, बल्कि एक पूरी सुरक्षित और सम्मानजनक इमारत बने जो इन बच्चों के सपनों को पूरा करने लायक हो।
सरकार ने एक नया पक्का कमरा बनाने के लिए राशि जारी कर दी है और जल्द ही टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
चमन लाल, डिप्टी सीईओ, बिलावर
गवर्नमेंट मिडिल स्कूल जखनु मे टीन की छत के नीचे पढ़ाई करते विद्यार्थी। स्रोत संवाद।- फोटो : mathura