देश भर में कानून-व्यवस्था को बनाए रखने के साथ आंतरिक सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा करने के लिए अपने प्राणों का आहुति देने वाले पुलिस कर्मियों की याद में मंगलवार को पुलिस स्मृति दिवस मनाया गया। जिला पुलिस लाइन में आयोजित कार्यक्रम में जिला पुलिस के साथ नागरिक प्रशासन के आला अधिकारियों व गणमान्य नागरिकों ने बलिदानी जवानों को श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस दौरान बलिदानी जवानों के परिजनों की आंखें छलक पड़ीं। उनकी ओर से दी गई अश्रुपूरित श्रद्धांजलि ने लोगों को भावुक कर दिया।
मंगलवार को कार्यक्रम की शुरुआत पुलिस सेरेमोनियल परेड से हुई, जिसकी कमान प्रोबेशनरी डीएसपी नितिश शर्मा ने संभाली, जबकि पीएसआई मुर्तजा रहमान ने द्वितीय परेड कमांडर की भूमिका निभाई। परेड के माध्यम से शहीदों को सलामी दी गई। इसके उपरांत एसएसपी मोहिता शर्मा ने देशभर के उन पुलिसकर्मियों के नाम पढ़े जिन्होंने राष्ट्र की अखंडता और सुरक्षा के लिए अपने प्राण न्यौछावर किए। उन्होंने कहा कि इन शहीदों का बलिदान देश की आत्मा में सदा जीवित रहेगा।
कार्यक्रम के दौरान शहीद स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की गई, जिसमें एसएसपी के साथ डीसी राजेश शर्मा, एडिशनल एसपी राहुल चाढ़क , डीएसपी डीएआर रितेश सम्याल, डीएसपी मुख्यालय रविंदर सिंह, एसडीपीओ बॉर्डर धीरज कटोच, डीएसपी पीसी अश्वनी शर्मा सहित पुलिस, प्रशासन, सुरक्षा बलों के अधिकारी, सेवानिवृत्त पुलिसकर्मी, शहीदों के परिजन और कठुआ के गणमान्य नागरिकों ने शहीद स्मारक पर श्रद्धासुमन अर्पित किए। जबकि कार्यक्रम में शामिल बलिदानी जवानों के परिवारों के सदस्यों को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया।
परिजनों से संवाद और सहयोग का आश्वासन
कार्यक्रम के दौरान एसएसपी मोहिता शर्मा ने शहीदों के परिजनों से संवाद किया। इस दौरान उन्हाेंने बलिदानी परिवारों की समस्याओं को सुनने के बाद एसएसपी ने उन्हें कठुआ पुलिस की ओर से हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया। उन्होंने बलिदानी परिवारों को ढांढ़स बंधवाते हुए कहा कि वह जम्मू कश्मीर पुलिस परिवार का हिस्सा है, लिहाजा वह हर सुख और दुख में सहभागी है।
इसलिए मनाया जाता है स्मृति दिवस
जम्मू-कश्मीर के लद्दाख में जमा देने वाली ठंड में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की टुकड़ी तैनात थी। 21 अक्तूबर को 1959 को लद्दाख के हॉट स्प्रिंग में देश की सुरक्षा की प्रथम पंक्ति में तैनात सीआरपीएफ के दल पर चीनी सेना ने घात लगाकर हमला किया था, जिसमें सीआरपीएफ के 10 जवानों ने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था। सीआरपीएफ के इन बहादुरों के असाधारण कार्य को याद करने के लिए 21 अक्तूबर को देशभर में पुलिस स्मृति दिवस मनाया जाता है।