जिले के दूरदराज मछेड़ी क्षेत्र के बजोई गांव की बेटी अनेखा देवी ने अपनी अदम्य इच्छाशक्ति और संघर्ष से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का परचम लहराया है। 75 फीसदी दृष्टिहीनता के बावजूद अनेखा इस समय नेत्रहीनों के क्रिकेट विश्व कप में भारतीय टीम का हिस्सा हैं और शानदार प्रदर्शन कर रही हैं। उनका कहना है कि विश्वकप में जीत का लक्ष्य लेकर पूरी टीम खेल रही है।
अनेखा ने श्रीलंका के खिलाफ पहले ही मैच में दमदार खेल दिखाया, जिसे भारतीय टीम ने मात्र तीन ओवर में समाप्त कर दिया। शुरुआती मैचों में थोड़ी नर्वस थीं, लेकिन पाकिस्तान के खिलाफ बेहतरीन प्रदर्शन ने उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच का खिताब दिलाया और आत्मविश्वास को नई ऊंचाई दी। संवाद न्यूज एजेंसी से फोन पर बातचीत में उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर राज्य के खिलाफ खेलना और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करना एक अलग ही जिम्मेदारी है। अनेखा ने भावुक होकर कहा कि देश की उम्मीदें और सपने हम पर टिके होते हैं। हर खिलाड़ी की कोशिश होती है कि अच्छा प्रदर्शन कर नाम रोशन करें।
भारत और पाकिस्तान के बीच हुए मुकाबले को लेकर उन्होंने बताया कि यह मैच अपने आप में रोमांचक होता है। कई बार विरोधी टीम के खिलाड़ी उकसाने की कोशिश करते हैं, लेकिन कोच और प्रबंधन के निर्देशों के बाद भारतीय खिलाड़ी पूरी एकाग्रता से खेल पर ध्यान केंद्रित करते हैं।
फिलहाल अनेखा टीम के साथ श्रीलंका के कोलंबो में मौजूद है, जहां 22 नवंबर को विश्वकप का सेमीफाइनल और 23 नवंबर को फाइनल मुकाबला खेला जाएगा। पूरी टीम का लक्ष्य भारत को इस प्रतियोगिता में विश्व विजेता बनाना है।
अनेखा ने कहा कि यह उनके सफर की केवल शुरुआत है। कहा कि मुझे अभी लंबी पारी खेलनी है और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपना अलग मुकाम बनाना है। इसके लिए करोड़ों देशवासियों की दुआओं और साथ की जरूरत है।
जनवरी में शुरू होने जा रहे राष्ट्रीय खेलों में भी अनेखा ने अपने प्रदर्शन से टीम में जगह बनाई है। उनकी सफलता न केवल कठुआ जिले बल्कि पूरे जम्मू-कश्मीर के लिए गर्व का विषय है।