आरोपी के व्यक्तिगत और जमानत बांड को खारिज करने का आदेश
कठुआ। विशेष मोबाइल मजिस्ट्रेट ने आबकारी अधिनियम मामले के आरोपी को पांच साल बाद बरी कर दिया है। आदेश के अनुसार मामले की जांच एक ऐसे अधिकारी की ओर से की गई है, जो जांच करने में सक्षम नहीं था। अदालत ने चालान को इसी आधार पर खारिज करने का निर्देश दिया है।
इसके अलावा कोर्ट ने आरोपी के व्यक्तिगत और जमानत बांड को भी खारिज करने का आदेश सुनाया है। पुलिस की ओर से कोर्ट में दायर रिपोर्ट के अनुसार मामले में आरोपी विनोद कुमार निवासी कालीबाड़ी कठुआ को आबकारी अधिनियम की धारा 48 (ए) के तहत वर्ष 2020 को गिरफ्तार कर आगे की कार्रवाई की गई थी। आरोपी के खिलाफ 6 अक्टूबर 2021 को कोर्ट में आरोप पत्र तय किए गए थे। इसके बाद अभियोजन पक्ष को आरोपी के खिलाफ साक्ष्य पेश करने का निर्देश दिया गया था। अभियोजन पक्ष की ओर से कोर्ट में गवाही के लिए केवल एक ही गवाह को पेश किया गया। सुनवाई के दौरान आरोपी के वकील ने बताया कि मामले में जांच एएसआई भूरी सिंह की ओर से की गई है, जो आबकारी अधिनियम के स्थापित प्रावधानों के तहत सक्षम नहीं थे। इसके बाद आरोपी के वकील ने कोर्ट से मुव्वकिल को बरी करने की मांग की। इसे कोर्ट ने मान लिया और आरोपी को बरी करने का आदेश दिया। संवाद