कठुआ। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने पहले के बयान से मुकर रहे गवाह के दोबारा बयान दर्ज करने की याचिका को खारिज कर दिया है। आदेश के अनुसार, न्यायालय ने सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न उच्च न्यायालयों के निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि जांच एजेंसी द्वारा प्रायोजित न किए गए गवाह का बयान दोबारा दर्ज करना कानूनन संभव नहीं है। इसके अलावा कोर्ट ने आशंका जताई कि गवाह पर आरोपी द्वारा दबाव या प्रभाव डाला गया हो सकता है। लिहाजा याचिकाकर्ता की अर्जी को खारिज करने का निर्देश दिया जाता है।
कोर्ट में दायर आवेदन के मुताबिक, याचिकाकर्ता ने इश्तियाक अहमद, पुत्र अत्तर बेग, निवासी मछेड़ी ने बीते 30 जुलाई को कोर्ट में अपने वकील के माध्यम से एक याचिका दायर की गई। जिसमें याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि बीते वर्ष बीते वर्ष भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने मछेड़ी पटवार हलके में तैनात एक पटवारी को भ्रष्टाचार के आरोप में रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। जिसमें याचिकाकर्ता एक गवाह था। उसने कोर्ट को बताया कि क्योंकि वह ज्यादा पढ़ा लिखा नहीं है। लिहाजा उसने आरोपी पटवारी के खिलाफ झूठा बयान दर्ज करवाया था। वह अब अपने बयान को दोबारा दर्ज करवाना चाहता है। उसने अपने बयान को बदलने की कोर्ट से अनुमति की मांग की है। 20 अगस्त को कोर्ट याचिका पर सुनवाई के दौरान जांच एजेंसी ने कोर्ट को बताया कि मामला अंतिम चरण में है और सभी गवाहों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं। लोक अभियोजक ने याचिका को अस्वीकार्य बताया और कहा कि यह मामला विशेष भ्रष्टाचार न्यायालय के अधिकार क्षेत्र में आता है। इसके बाद कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद याचिका को रद्द कर दिया गया। वहीं कोर्ट ने विभिन्न न्यायालयों के निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि जांच एजेंसी द्वारा प्रायोजित न किए गए गवाह का बयान दोबारा दर्ज करना कानूनन संभव नहीं है। जिसके बाद अदालत ने याचिका को खारिज कर दिया गया।
यह है मामला
बीते वर्ष 2024 को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की टीम ने मछेडी पटवार हलके में तैनात एक पटवारी को रिश्वत लेने के आरोप में रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद एसीबी की टीम ने आरोपी पटवारी के खिलाफ एसीबी जम्मू सेंट्रल में मामला दर्ज कर आरोपी पटवारी के घर में छापेमारी कर पुख्ता सबूतों को जुटाने का दावा भी किया था। हालांकि कुछ समय बाद आरोपी पटवारी को न्यायालय में जमानत मिल गई थी, लेकिन वर्तमान में मामला विशेष भ्रष्टाचार न्यायालय में विचाराधीन है।