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शिक्षा का उद्देश्य जीवन को उच्च आदर्शों की ओर ले जाना है: अधोक्षजानंद

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कठुआ। शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञानार्जन नहीं बल्कि जीवन को उच्च आदर्शों की दिशा में ले जाना है। प्रबंधन समिति विद्यार्थियों को हर वर्ष किसी तीर्थस्थल का दर्शन कराए ताकि उनमें भारतीय संस्कृति और राष्ट्रभाव की गहरी जड़ें विकसित हों।
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यह बातें शुक्रवार को गोवर्धनपुरी पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अधोक्षजानंद देवतीर्थ महाराज ने चूड़ामणि संस्कृत संस्थान विश्वस्थली बसोहली में कही। अपने उपदेश में शंकराचार्य अधोक्षजानंद ने विद्यार्थियों को सत्य, सेवा और संस्कार की शक्ति का स्मरण कराया।



इस प्रेरणादायी संदेश से विद्यार्थियों और गुरुकुल परिवार में नई चेतना और उत्साह का संचार हुआ। समापन पर गुरुकुल की ओर से शंकराचार्य महाराज जी को अभिनंदन-पत्र अर्पित किया गया। कार्यक्रम के बाद श्रद्धालुओं ने उनके आशीर्वचन सुने और गुरुकुल परिसर को आध्यात्मिक ऊर्जा से आलोकित अनुभव किया।
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इससे पहले कार्यक्रम की शुरुआत गुरुकुल के विद्यार्थियों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चारण से हुई जिसने वातावरण को पवित्र बना दिया। इसके बाद भक्तिगीत और भजन प्रस्तुत किए गए। इस मौके पर मुख्य न्यासी शक्ति कुमार पाठक ने परंपरागत गुरुपूजा संपन्न कर सभा को संबोधित करते हुए कहा कि जगद्गुरु का आगमन गुरुकुल के लिए गौरव का पर्व है। श्रद्धालुओं और नगरवासियों ने भी शंकराचार्य महाराज जी का विधिवत गुरु पूजन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।



समारोह का संचालन प्राचार्य डॉ. सौम्य रंजन मोहापात्र ने किया। उप-प्राचार्य आचार्य शशिनाथ उपाध्याय ने धन्यवाद ज्ञापन दिया। इस अवसर पर नगर के श्रद्धालु, गुरुकुल परिवार, प्रबंधन समिति और विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
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