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Kathua News: धार्मिक स्थल की गलत एआई तस्वीर सोशल मीडिया पर प्रसारित करने वाले आरोपी को मिली सशर्त जमानत

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15 अप्रैल को कोर्ट ने आरोपी को दी थी अग्रिम जमानत
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संवाद न्यूज एजेंसी



कठुआ। बनी स्थित हिंदू मंदिर को एआई का इस्तेमाल कर मस्जिद के रूप में कथित रूप से प्रसारित करने के एक मामले में न्यायालय ने आरोपी को सशर्त जमानत दी है। आरोपी को गत 15 अप्रैल को न्यायालय ने अग्रिम जमानत दी थी। अदालत ने अपने आदेश में कहा है कि आरोपी मामले की जांच में सहयोग कर रहा है। लिहाजा उसकी हिरासत की कोई आवश्यकता नहीं है। कोर्ट ने आरोपी को आगे भी इसी तरह जांच में सहयोग करने का आदेश दिया है, ताकि मामले की जांच अपने तार्किक निष्कर्ष तक पहुंच सके।
कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि अगर आरोपी किसी भी शर्त का उल्लंघन करता है तो अभियोजन पक्ष आरोपी की जमानत याचिका को रद्द करवाने की मांग कर सकता है। आरोपी की जमानत याचिका की सुनवाई अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीन पंडोह की कोर्ट में की गई। दायर जमानत याचिका के अनुसार, आरोपी नासिर हुसैन खान निवासी लोवांग पर आरोप है कि उसने अपने सोशल मीडिया पोस्ट से हिंदू मंदिर की तस्वीर को एआई से इस तरह बदला कि वह मस्जिद के रूप में दिखाई दे। आरोपी के इस कृत्य को स्थानीय लोगों ने धार्मिक भावनाओं को जानबूझकर भड़काने और भय का माहौल बनाने की कोशिश बताया था।
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इसके बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ बीएनएस और आईटी एक्ट की धारा के तहत प्राथमिक दर्ज की थी। गत 18 मई को कोर्ट में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील ने आरोपी को स्थायी जमानत दिए जाने की वकालत की। सरकारी वकील जमानत का विरोध करते हुए अदालत को बताया कि आरोपी जांच में सहयोग नहीं कर रहा था। आरोपी का नोटिस तामील कराने के लिए पुलिस की एक टीम तेलंगाना भी भेजी गई, जहां वह रह रहा था, लेकिन वह वहां नहीं मिला। इसके अलावा, आरोपी का मोबाइल फोन जब्त कर फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) भेजा जाना अभी शेष है।
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सरकारी वकील ने तर्क दिया कि आरोपी को जमानत मिलने पर वह डिजिटल साक्ष्यों से छेड़छाड़ कर सकता है, गवाहों को प्रभावित कर सकता है या फिर से आपत्तिजनक सामग्री प्रसारित कर सकता है। अदालत ने दोनों पक्षों के सुनने के बाद पाया कि आरोपी की हिरासत में पूछताछ आवश्यक नहीं है तथा जांच लगभग पूरी हो चुकी है। कोर्ट ने सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न महत्वपूर्ण निर्णयों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि आरोपी को जिन शर्तों के साथ अंतरिम अग्रिम जमानत दी गई थी, उन्हीं शर्तों के साथ सर्शत जमानत स्वीकृत की जा रही है।
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