पिछले साल की घटनाएं बनीं चेतावनी
गौरतलब है कि पिछले वर्ष अप्रैल में आतंकियों ने बसंतगढ़ में अपनी मौजूदगी दर्ज कराते हुए एक वीडीजी सदस्य को बलिदान कर दिया था। इसके बाद बसंतगढ़, डुडू सहित डोडा के जंगलों में कई आतंकी गतिविधियां देखी गईं और कई स्थानों पर मुठभेड़ें भी हुईं।
इस वर्ष भी गर्मियों की शुरुआत के साथ ही आतंकियों ने सीमा पार कर कठुआ जिले में घुसपैठ की कोशिश की, जिसमें सुरक्षाबलों ने कई आतंकियों को ढेर कर दिया। हालांकि, अब भी कुछ इलाकों से संदिग्ध गतिविधियों की सूचनाएं मिलने पर उधमपुर जिले को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
आतंकियों की रणनीति पर नजर
सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, गर्मियों के मौसम में आतंकी घने जंगलों में शरण लेते हैं और कठुआ, बिलावर से होते हुए बसंतगढ़ पहुंच जाते हैं। खतरा बढ़ने पर वे डुडू बसंतगढ़ के जंगलों से डोडा या भद्रवाह की ओर भागने की कोशिश करते हैं। उधमपुर जिले का बसंतगढ़ क्षेत्र अपने पहाड़ी और घने जंगलों के कारण आतंकियों के लिए आदर्श छिपने की जगह बन जाता है।
जहां से वे अपनी गतिविधियों को अंजाम देने की फिराक में रहते हैं।सुरक्षा बलों ने इन क्षेत्रों में न केवल गश्त बढ़ा दी है, बल्कि स्थानीय निवासियों से भी सहयोग की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि आम जनता की सजगता और सहयोग से आतंकवाद पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है।
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