अंतरराष्ट्रीय सीमा पर आतंकी घुसपैठ की सूचनाओं के मद्देनजर सुरक्षा व्यवस्थाओं का केंद्रीय सुरक्षा समिति ने जायजा लिया और सुरक्षा पहलुओं पर गौर किया। टीम ने सीमावर्ती ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों की समस्याएं सुनीं।
जम्मू कश्मीर में सबसे संवेेदनशील हीरानगर सेक्टर है। इस क्षेत्र में जाकर टीम ने तारबंदी, नाइट विजन, लेजर रैस लगाने की संभावनाओं, सायरन लगाने व नालों पर सुरक्षा व्यवस्था को कड़ी करने पर विस्तार चर्चा की गई।
पंजाब में हुए दो आतंकी हमलों में बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय की टीम ने कठुआ के सीमा से सटे इलाकों का यह दौरा किया है। टीम का नेतृत्व पूर्व गृह सचिव मधुकर गुप्ता कर रहे थे। इससे पहले टीम पंजाब के पठानकोट क्षेत्र में भी हवाई सर्वेक्षण कर चुकी है।
टीम के सदस्य भारत पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सुरक्षा को और कड़ा करने, बार्डर पर फेंसिंग में गैप कम करने और इसके अस्थायी और स्थायी हल के सुझाव गृह मंत्रालय को सौंपेंगे। टीम के सदस्यों को जून के आखिर तक इस रिपोर्ट को केंद्र सरकार को सौंपना है, ताकि सुझावों पर अमल लाते हुए सुरक्षा पहरे की खामियों में सुधार किया जा सके।
हीरानगर के मनियारी इलाके में ग्रामीणों ने टीम के सदस्यों को लंबित मांगों से अवगत करवाया। इनमें जीरो लाइन के पार भारतीय किसानों की भूमि पर खेती न होने से हुए नुकसान और सुरक्षा नालों के लिए इस्तेमाल की गई भूमि का मुआवजा देने की मांग की।
सूत्रों के अनुसार टीम ने फिलहाल तारबंदी से आगे जमीन पर खेती करने के मामले में कोई फैसला नहीं लिया। कठुआ में सीमावर्ती इलाके के दौरे के दौरान बीएसएफ के उच्च अधिकारी भी उनके साथ मौजूद रहे।