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Kathua News: लोगों के लिए फिर मुसीबत बन सकता है तरनाह नाला

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हीरानगर। पिछले वर्ष की तरह इस बार भी बरसात में तरनाह नाला आम लोगों के लिए बड़ी समस्या पैदा कर सकता है।
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राष्ट्रीय राजमार्ग के विस्तारीकरण के चलते यहां पुल बना रही कंपनी ने पिछले साल इस नाले का रुख एक किनारे की तरफ मोड़ दिया था। इसका नतीजा यह हुआ कि पूरे नाले में जब पूरी रफ्तार से पानी आया तो यहां बना हाईवे का पुल 19 जुलाई को धंस गया। इसकी आज तक मरम्मत नहीं हुई है। इसके नजदीक के नए पुल का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है और कुछ दिनों में ही इस पर वाहनों की आवाजाही शुरू हो जाएगी लेकिन डर यह है कि नाले में पानी का रुख उसी जगह है, जहां पिछले साल पानी से भारी नुकसान हुआ था और अगले महीने तक फिर से बरसात शुरू होने वाली है। इससे पहले पानी का रुख बदलने का इंतजाम नहीं किया गया तो नए पुल को भी बाढ़ का पानी नुकसान पहुंचा सकता है।
बता दें कि पिछले साल भी जब पानी का रुख एक तरफ मोड़ा गया तो लोगों ने यहां काम कर रही कंपनी के अधिकारियों को ऐसा न करने को कहा और इससे पुल को नुकसान होने का अंदेशा जताया लेकिन कंपनी ने उनकी नहीं सुनी, जिसका नतीजा आम लोगों को भुगतना पड़ा। पुल धंसने के बाद पंजाब से जम्मू कश्मीर का हाईवे संपर्क पूरी तरह से टूट गया। ओल्ड सांबा कठुआ सड़क को विकल्प रूट के रूप में इस्तेमाल किया गया। लोगों ने करीब तीन महीने तक गिरते संभलते पैदल नाले को पार किया। दो किलोमीटर की दूरी पर स्कूल है लेकिन फिर भी बच्चे स्कूल नहीं पहुंच पाए। लोगों को दो किलोमीटर का सफर 25 से 30 किलोमीटर में पूरा करना पड़ा। अभी भी यहां मुसीबतें कम नहीं हुई हैं। नाले में बनाए गए अस्थायी वैकल्पिक मार्ग की हालत बदतर है। लगभग एक साल पूरा होने को है लेकिन अभी तक लोगों को इस नाले पर पुल की सुविधा नहीं मिली है, जिससे लोगों में हाईवे अथॉरिटी के प्रति भारी रोष है।
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चड़वाल के दुकानदार सोनू शर्मा ने कहा कि पिछले साल बरसात में धंसे पल की मरम्मत का काम आज तक पूरा नहीं हुआ है और दोबारा बरसात आने वाली है। पुल धंसने से आम लोगों को जिन परेशानियों का सामना करना पड़ा है वे लोग ही जानते हैं। बरसात के मौसम में लोग हाईवे से होकर न अस्पताल जा सकते थे और न ही बच्चे स्कूल। अब जिस तरह से यहां काम चल रहा है, उससे यही प्रतीत होता है कि इस बार फिर बरसात शुरू होने पर लोगों को वही पुरानी परेशानी झेलनी पड़ेगी। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि पानी का रुख नहीं बदला गया है। इससे इस नाले में आने वाला पानी नए पुल को भी नुकसान पहुंचाएगा और अगर ऐसा हुआ तो फिर से लोगों को दो किलोमीटर का सफर 25 से 30 किलोमीटर में करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि हाईवे अथॉरिटी ने फरवरी में पुल की मरम्मत करने का दावा किया था लेकिन अभी तक सिर्फ पिलर का काम ही पूरा हुआ है।


युवा कांग्रेसी नेता रोमी शर्मा ने कहा कि पिछले साल बरसात में पुल धंसने की वजह से आम लोगों को तो परेशानी हुई ही। सबसे अधिक परेशानी बाबा अमरनाथ के श्रद्धालुओं को हुई। जिस धीमी गति से यहां पुल की मरम्मत का कार्य चल रहा है और जिस तरह से अवस्थित ढंग से नए पुल को बनाया गया है, उससे लगता है कि इस बरसात में भी लोगों को और अमरनाथ यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा। यहां काम कर रही कंपनी को भी कोई पूछने वाला नहीं है। उन्होंने भी नया पुल तैयार कर दिया लेकिन पानी के बहाव के रास्ते को तैयार नहीं किया। इस बरसात में भी पानी एक ही किनारे से गुजरेगा, जिससे निश्चित तौर पर नए पुल को नुकसान होगा और आम लोगों को परेशानी।
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सामाजिक कार्यकर्ता राकेश चौधरी ने कहा कि हाईवे अथॉरिटी आम लोगों की परेशानी को लेकर जरा भी गंभीर नहीं है। एक साल का वक्त पूरा होने को है और इस नाले पर लोगों को अभी तक पुल नहीं मिला है। ऐसे में अगर यह नाला पिछले साल की तरह अपना रौद्र रूप दिखाता है तो लोगों को फिर से बड़ी मुसीबत का सामना करना पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि पिछले साल ओल्ड सांबा कठुआ सड़क से यातायात परिवर्तित किया गया था लेकिन इस बार उसकी हालत बेहद खस्ता हो चुकी है। इस सड़क से चलना और नाले के बीच से गुजरना अब एक जैसा ही हो गया है। अफसोस की बात है कि नाले में पुल बना रही कंपनी ने पिछली बार के हालातों से कोई सबक नहीं लिया और जिस तरह से काम चल रहा है, उससे लगता है कि बरसात में लोगों को फिर से बड़ी मुसीबत झेलनी पड़ेगी।
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तरनाह में नए पुल का निर्माण कर रही कंपनी के साइट इंजीनियर रवि कुमार ने बताया कि फिलहाल पानी की दिशा बदलने को लेकर कोई काम नहीं किया गया है लेकिन पिछले साल बरसात के बाद जो नाले में वैकल्पिक मार्ग बनाया गया था, वहीं पर पानी के बहाव के साथ आने वाला रेत पत्थर रुकेगा, जिससे बहाव की गति पर रोक लगेगी। उन्होंने बताया कि पुल की ऊपरी तरफ भी सुरक्षा दीवार बनाई जाएगी लेकिन यह बरसात से पहले संभव नहीं है।
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