बपने बनाए गए उत्पाद की पैकिंग में व्यस्त सुकराला माता महिला स्वयं सहायता समूह की सदस्य। स्रोत क
जिले की दूरदराज पंचायत दन्नी की दस महिला किसानों द्वारा गठित ‘सुकराला माता महिला स्वयं सहायता समूह’ आज ग्रामीण महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता का प्रेरणादायक उदाहरण बन चुका है। समूह की अध्यक्ष रीता ठाकुर के नेतृत्व में ये महिलाएं न केवल आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं, बल्कि अन्य ग्रामीण महिलाओं को भी स्वरोजगार की दिशा में प्रेरित कर रही हैं।
सितंबर 2024 में कृषि उत्पादन विभाग कठुआ द्वारा ‘कठुआ खेती’ ब्रांड के अंतर्गत समूह को मोरिंगा (सहजन) की पत्तियों, जड़ों और फलों से अचार एवं पाउडर तैयार करने का प्रशिक्षण प्रदान किया गया। इस प्रशिक्षण का व्यावहारिक लाभ उठाते हुए समूह ने अमरनाथ यात्रा 2025 के दौरान अपने उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई और बिक्री के माध्यम से अच्छा लाभ अर्जित किया।
इसके अतिरिक्त, सर्दियों के मौसम में समूह ने व्हाइट बटन मशरूम की खेती को प्राथमिकता दी। कृषि विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन में इन महिलाओं ने मशरूम उत्पादन की विधियों को अपनाया और स्थानीय बाजार में सफलतापूर्वक बिक्री कर आय प्राप्त की। समूह की अध्यक्ष रीता ठाकुर ने जानकारी दी कि उनके समूह ने बांस, सूरन, आंवला, कटहल और अन्य मौसमी सब्जियों से तैयार अचार की बिक्री कर लगभग 50,000 की कमाई की है। यह उपलब्धि दर्शाती है कि सीमित संसाधनों के बावजूद महिलाएं नवाचार, परिश्रम और सामूहिक प्रयासों से आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकती हैं।
कृषि विभाग की नोडल अधिकारी पूजा अंदोत्रा ने बताया कि सुकराला माता समूह की सफलता ने अन्य ग्रामीण महिलाओं को भी विभाग से जुड़ने और स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ाने के लिए प्रेरित किया है। उन्होंने कहा कि यह समूह कठुआ जिले में महिला सशक्तिकरण का सशक्त प्रतीक बनकर उभरा है, जो ग्रामीण विकास और सामाजिक बदलाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।