शहर से सटे बरवाल गांव में सात दिनों तक चलने वाली श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का शुभारंभ हो गया। सोमवार को कथा के शुभारंभ पर भव्य कलश यात्रा का आयोजन किया गया। कथा स्थल से बैंड-बाजे के साथ निकाली गई कलश यात्रा में सैकड़ों भक्तों ने भाग लेकर भगवान श्रीहरि का गुणगान करते हुए ऐरवां स्थित पवित्र बावली पहुंचे। जहां विधिविधान से कलश में बावली के पवित्र जल को भरा और वापस कथा स्थल पहुंचे। कलश की स्थापना के साथ ही कथा का शुभारंभ हो गया।पहले दिन की कथा के दौरान कथाव्यास पंडित मनोहर लाल शास्त्री ने उपस्थित भक्ताें काे श्रीमद्भागवत कथा महात्म्य की जानकारी देते हुए कहा कि श्रीमद् भागवत कथा केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि आध्यात्मिक और नैतिक जीवन जीने की मार्गदर्शिका है।श्रीमद् भागवत कथा को भक्ति योग का सर्वोच्च साधन माना गया है। यह आत्मा को संसार के बंधनों से मुक्त करके ईश्वर के चरणों में स्थापित करने का माध्यम है। भागवत कथा के श्रवण से मनुष्य के समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं। इसमें वर्णित भगवान की लीलाओं का श्रवण और मनन करते समय मनुष्य का हृदय पवित्र होता है। कथा में आध्यात्मिक ज्ञान और संसार की असारता का बोध कराया गया है। यह मनुष्य को आत्मज्ञान और वैराग्य के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करती है।
उन्होंने बताया कि भगवत कथा केवल जीवित मनुष्य को ही नहीं, बल्कि पितरों और मृत आत्माओं को भी सद्गति प्रदान करती है। गोकरण जी द्वारा अपने भाई धुंधकारी की मुक्ति का प्रसंग इसका प्रमाण है। कथा में प्रह्लाद, ध्रुव, गजेन्द्र, और रुक्मिणी जैसे अनेक भक्तों के चरित्र का वर्णन है, जो भक्ति और ईश्वर पर विश्वास का अद्भुत संदेश देते हैं।
श्रीमद् भागवत कथा मनुष्य को जीवन का सत्य सिखाती है और उसे अपने सच्चे लक्ष्य भगवान की भक्ति और मोक्ष की प्राप्ति की ओर प्रेरित करती है। इसे सुनने और समझने से न केवल इस जन्म में, बल्कि अनगिनत जन्मों के पाप समाप्त हो जाते हैं। अतः, इस कथा का श्रवण और प्रचार-प्रसार अत्यंत पुण्यदायक है।