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Kathua News: जिले की दो बड़ी झीलें खोलेंगी पर्यटन और रोजगार के द्वार

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शाहपुर कंडी जलाशय के भरने से तैयार हो रही झील
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- रंजीत सागर झील के बाद विहंगम नजारा प्रस्तुत कर रही शाहपुर कंडी झील
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-जम्मू-पठानकोट नेशनल हाईवे से मात्र 15 मिनट की दूरी पर


संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। कठुआ जिले में एक नहीं बल्कि दो बड़ी कृत्रिम झीलें अब पर्यटन के साथ रोजगार के द्वार खोलने जा रही हैं। वाटर स्पोर्ट्स के अतिरिक्त यहां मछलीपालन को लेकर संभावनाएं और बढ़ गई हैं। वो दिन दूर नहीं जब रंजीत सागर झील की ही तरह शाहपुर कंडी बांध पर तैयार हुई विशाल झील में पर्यटक बोटिंग का लुत्फ लेते नजर आएंगे।
कठुआ और पंजाब की सरहद पर इन दिनों शाहपुर कंडी बांध के जलाशय को भरने का काम जारी है। सवा सात वर्ग किलोमीटर तक फैली इस झील का नजारा इसके आसपास के गुजरने वाले लोगों को आकर्षित कर रहा है। शाहपुर कंडी झील को रंजीत सागर बांध से 11 किलोमीटर नीचे और माधोपुर हैड वर्क्स से आठ किलोमीटर ऊपर की ओर तैयार किया गया है।
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शाहपुर कंडी बांध का जलाशय बढ़कर जहां अब 393 मीटर के पार होगा है तो वहीं रंजीत सागर झील की तरह ही एक बड़ी झील आकार ले चुकी है। जम्मू-पठानकोट नेशनल हाईवे से मात्र 15 मिनट की दूरी पर झील देशभर से आने वाले पर्यटकों के लिए आकर्षण बनना तय माना जा रहा है।
वर्तमान में रंजीत सागर जलाशय का जलस्तर काफी कम हुआ है। शाहपुर कंडी झील को भरने के लिए रंजीत सागर बांध में लगातार बिजली उत्पादन कर पानी छोड़ा जा रहा है। शाहपुर कंडी झील के भरने के बाद गर्मी के सीजन में पहाड़ों पर बर्फ पिघलने और बरसात से रंजीत सागर झील एक बार फिर भर जाएगी। थीन वन्यजीव क्षेत्र से सटे इन इलाकों पहले ही जहां प्रवासी पक्षी हर साल रंजीत सागर झील पहुंचते हैं वहीं शाहपुर कंडी झील भी प्रवासी पक्षियों का बसेरा बनने की उम्मीद है।

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झील पर्यटन को काफी बढ़ावा दे सकती है। जिस तरह से यह झील तैयार हुई है, यहां आने वाले दिनों में लोग परिवार के संग समय बिताने को आएंगे। क्षेत्र के लोगों का रोजगार बढ़ेगा। साथ ही इलाके की खूबसूरती को भी चार चांद लग गए हैं। इसे पर्यटन के लिहाज से और विकसित किया जाना चाहिए।

-सोनी सुनिता, पूर्व सरपंच बसंतपुर


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मछलीपालन विभाग भी झील को लेकर कर रहा विचार

रंजीत सागर झील में हर साल होने वाले एक करोड़ से अधिक के मछली पकड़ने के ठेके के बाद मछलीपालन विभाग दूसरी तैयार हुई इस कृत्रिम झील में मत्सय पालन को बढ़ावा देने के प्रयास शुरू कर चुका है। विभाग के सहायक निदेशक पवन पाल ने बताया कि उन्होंने झील का जायजा लिया है और स्टॉफ को इस संबंध में रिपोर्ट जमा करने के लिए कहा गया है। झील में मछलियों का संरक्षण और इसे पकड़ने के लिए सरकारी की नीति के मुताबिक स्थानीय मछुआरों को भी बढ़ावा मिल सकती है। यह जम्मू कश्मीर में आयात होने वाली मछलियों के बोझ को कम करेगी। इसके लिए उच्च अधिकारियों से निगरानी तंत्र बढ़ाने के लिए भी बात की जाएगी।
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बसोहली विधानसभा क्षेत्र के लिए यह दूसरी बड़ी झील है। कंडी के किसानों के लिए यह सिंचाई का बड़ा जरिया बनने के साथ ही प्रदेश में पर्यटन को भी बढ़ावा देगी। मछली पालन से लेकर झील में वॉटर स्पोटर्स की गतिविधियों को अंजाम देकर यह झील क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करेगी। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह से इसे बढ़ावा देने के लिए परियोजना के संबंध में मांग रखी गई है।


ठाकुर दर्शन सिंह, विधायक बसोहली

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