संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। साहित्य अकादमी की ओर से ग्रामालोक-एक दिन के कविता पाठ का आयोजन किया गया। वीरवार को राजकीय मिडिल स्कूल बॉयज में आयोजित कार्यक्रम में डोगरी के कवि और शायरों ने कविताएं व शेर सुनाकर समा बांधा। कार्यक्रम की अध्यक्षता साहित्य अकादमी के डोगरी परामर्श मंडल के संयोजक, पद्मश्री मोहन सिंह सलाथिया की ओर से की गई।
अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के उपलक्ष्य पर आयोजित कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण इलाकों के कवियों को मातृभाषा के प्रचार प्रसार के लिए प्रेरित करना था। कार्यक्रम में टीआर सुमब्रिया, एमएल तूफान, सरोज बाला, आरएस काटल, शशि शर्मा सहित स्नेह लता की ओर से कविता पाठ किया गया। शशि शर्मा ने दहेज प्रथा पर डोगरी कविता से शुरुआत की। इसका शीर्षक था कुड़ी तोआड़ी हुन साड़ी ओई, सानू कुछ और नेई चाइदा ... जिससे स्कूल का कमरा तालियों से गूंज उठा।
इसके बाद सरोज बाला ने बुजुर्गों पर आधारित डोगरी कविता साड़े बुजुर्गों को पेश की। आओ बुजुर्गें दा सम्मान करचे, भारतीय संस्कृति दा मान करचे। वहीं, कवि स्नेह लता की कविता डुग्गर दे बसनिक अज डोगरी नी बोलदे, डुग्गर दे बसनिक अज डोगरी नी बोल दे...बारली बोलिएं दा मान करदे, मां बौली गी करा च बार करदे ने महफिल लूट ली।
वहीं, कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए पद्मश्री मोहन सिंह ने कहा कि साहित्य अकादमी की ओर से ग्रामालोक आयोजन करने का उद्देश्य है कि गांव स्तर पर ग्रामीण कवि, शायरों और लेखक को मातृभाषा के लिए काम करने के लिए प्रेरित करना है। ताकि वे ज्यादा से ज्यादा डोगरी भाषा के उत्थान के लिए काम कर सके। वहीं, प्रदेश सरकार भी डोगरी के उत्थान के लिए विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन कर लेखकों, कवि और शायरों को मंच उपलब्ध करवा रही है।
वहीं, स्कूल हेडमास्टर जसवंत सिंह ने आयोजकों का धन्यवाद दिया। बच्चों ने डोगरी गीतों पर सांस्कृतिक कार्यक्रम का प्रदर्शन किया। जिसको आयोजकों की ओर से सराहा गया। इस मौके पर जिला सरकारी पुस्तकालय के लाइब्रेरियन सुनील शर्मा, कवि श्याम लाल, विश्वकर्मा सभा प्रधान करतार वर्मा आदि मौजूद रहे।