प्रदेश सरकार की ओर से मिली हिदायतों के बाद लोक निर्माण विभाग ने शहर की सड़कों की दशा सुधारने की कवायद शुरू कर दी है। कालीबड़ी चौक से हटली मोड़ चौक तक 46 लाख 57 हजार की लागत से सड़क किनारे और डिवाइडर पर रंग-रोगन के अलावा अन्य काम जारी हैं। डिवाइडर के पास इकट्ठा मिट्टी को उठाने के साथ सड़कों पर बने गड्ढों को भी भरा जाना है।
कठुआ शहर के कॉलेज रोड पर बीडीओ कार्यालय, शहीदी चौक और कैप्टन सुनील चौधरी चौक के बीच और पारलीवंड में बस स्टैंड के नजदीक सड़क पर बने गड्ढे हादसों को न्योता दे रहे हैं। ऐसा ही हाल हटली मोड़ चौक के पास है। अब इन सभी सड़कों की मरम्मत किए जाने की योजना है।
लोक निर्माण विभाग के सहायक कार्यकारी अभियंता सुभाष गुप्ता ने बताया कि सौंदर्यीकरण के साथ-साथ सड़क पर गड्ढों को भरने के लिए कवायद शुरू कर दी गई है। पेंट का काम जहां शुरू हो चुका है, वहीं अगले कुछ दिनों में विभिन्न सड़कों पर गड्ढे भी भर दिए जाएंगे।
प्रदेश में 40 हजार 178 किलोमीटर लंबे सड़कों के नेटवर्क को बेहतर करने के साथ-साथ जरूरी मरम्मत कार्य समय से सुनिश्चित करने के लिए लोक निर्माण विभाग ने एसओपी जारी कर दिए हैं। सभी मुख्य अभियंताओं को पिछले तीन साल में पक्की की गई सड़कों के नेटवर्क की रिपोर्ट तैयार करने, दोष दायित्व अवधि (डीएलपी) के दौरान क्षतिग्रस्त सड़कों को लेकर कार्यकारी अभियंताओं की ओर से उठाए गए कदमों की जानकारी एकत्रित करने के निर्देश दिए गए हैं। जम्मू और कश्मीर संभाग के सभी मुख्य अभियंताओं को अंतर जिला, जिला, ग्रामीण, मुख्य सड़कों आदि के जाल के वर्गीकरण के निर्देश भी जारी हुए हैं। उन्हें इन सड़कों को बनाने की तिथि, लंबाई से लेकर लाइफ स्पॉन के साथ-साथ रिन्यूअल कोट कब किया गया, इसकी जानकारी भी उपलब्ध करवाने को कहा गया है। जम्मू-कश्मीर में 23654 किलोमीटर सड़कों को विभिन्न योजनाओं के तहत ब्लैक टॉप किया गया है। ऐसे में इन सड़कों के रखरखाव से लेकर मरम्मत, पेवमेंट, गड्डे भरने और नालों की मरम्मत को भी समय से सुनिश्चित करने और बार-बार एक ही सड़क पर होने वाले कार्यों को कम करने के लिए यह कवायद शुरू की गई है।
समय पर मरम्मत न होने पर ठेकेदार के खिलाफ होगी कार्रवाई
जारी निर्देश के अनुसार संबंधित जूनियर इंजीनियर और वर्क सुपरवाइजर को अब उनके अधीन आने वाले सड़कों के हालात पर कड़ी नजर रखनी होगी। डीएलपी की अवधि में क्षतिग्रस्त होने वाली सड़कों को अधिक नुकसान से बचाने के लिए ठेकेदार की ओर से समय पर मरम्मत की जाए, यह भी सुनिश्चित करना होगा। ऐसा न होने पर संबंधित कार्यकारी अभियंता और ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश भी जारी कर दिए गए हैं। हर माह की 25 तारीख तक संबंधित कार्यकारी अभियंता के पास संबंधित रोड सुपरवाइजर या जूनियर इंजीनियर को सड़कों की स्थिति की रिपोर्ट जमा करवानी होगी। अन्यथा अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी भी जारी कर दी गई है। साल में तीन बार संबंधित सब डिवीजन को सड़क किनारे निकाले गए नालों की डिस्लिटिंग भी करवानी होगी ताकि इससे यातायात प्रभावित न हो। मानसून के पहले और बाद में सड़क किनारे बर्म भरने का काम भी हर हाल में सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए गए हैं।
मई या अक्तूबर में एक बार कराना होगा पेंट, मार्क का काम
जेब्रा क्रॉसिंग से लेकर सड़कों पर पेंट, किलोमीटर मार्क का काम मई या फिर अक्टूबर में साल में एक बार विभाग को सुनिश्चित करना होगा। यहां तक कि इन सड़कों पर हादसे के संबंध में जानकारी एकत्रित कर हादसे के कारण और लोकेशन की जानकारी भी फौरी तौर पर फील्ड स्टाफ को अब अपने उच्च अधिकारियों को सौंपनी होगी। एसओपी के संबंध में आदेश लोक निर्माण विभाग के सरकार में प्रधान सचिव की ओर से जारी किए गए हैं। साफ है कि इन आदेशों से जिम्मेदारी बांधने के साथ ही लापरवाही की गुंजाइशों को कम करने के भी प्रयास किए जा रहे हैं।