- न पक्की सड़क, बिजली-पानी की सुविधा भी नाममात्र
- बच्चे पैदल जाते हैं स्कूल, सिर पर ढोना पड़ता है पानी
हीरानगर। आजादी के 75 वर्षों बाद भी मढ़ीन तहसील के कंडी क्षेत्रीय गांव बासियां के लोग पक्की सड़क, बेहतर पानी और बिजली सुविधा को तरस रहे हैं। लोगों का कहना है कि आज भी उनके बच्चों को पैदल स्कूल जाना पड़ता है। पानी के लिए मीलों सफर तय करना पड़ता है। बिजली भी नाममात्र मिलती है। लोगों ने कहा कि आसपास के इलाके में सड़क, पानी और बिजली सब है, लेकिन उनके गांव की अनदेखी क्यों? संवाद
गांव को आज तक पक्की सड़क नहीं मिल पाई है। लोगों को पैदल चलकर दूसरे गांव से गाड़ी पकड़नी पड़ती है। बच्चों को भी पढ़ाई के लिए स्कूल पैदल जाना पड़ता है। अगर गांव में कोई बीमार हो जाता है तो बुलाने पर भी कोई गाड़ी गांव नहीं आती मजबूरन गांव के लोगों को ही मरीज को उठाकर पक्की सड़क तक ले जाना पड़ता है।
पूरन चंद, स्थानीय निवासी
गांव में पानी की कोई बेहतर सुविधा नहीं है। सप्ताह में दो या तीन दिन पानी आता है, लेकिन आता सिर्फ इतना ही है कि या तो आप खाना बना लो या पीने के लिए बचा लो। मजबूरी में महिलाएं को 600 मीटर पैदल चलकर सर पर पानी ढोना पड़ता है।
विजय कुमार, स्थानीय निवासी
गांव में बिजली व्यवस्था भी नाममात्र ही है। लटकते बिजली के तार, लो वोल्टेज और अघोषित बिजली कटौती हमारे लिए आम बात हो गई है। बिजली सुविधा अच्छी मिले या न मिले मोटा बिल हर महीने मिल जाता है।
बलवीर कुमार, स्थानीय निवासी