कठुआ। डुग्गन के दूर दराज इलाके में आबादी से कौसों दूर बर्फ से लदी पहाड़ों की चोटियों पर इस बार भी मां चंडी के जयकारे गूंजेंगे। वार्षिक नुकनाली यात्रा के लिए आयोजक दौला माता और ढाडू मंदिर कमेटियों की ओर से तैयारियों को दौर जारी है। चार नवंबर को इस साल वार्षिक नुकनाली यात्रा रवाना होगी। मां चामुंडा के जयकारों से आसपास के पहाड़ भी गूंज उठेंगे।
बनी, डुग्गन, ढ़ाडू, दौले और बाड़ी दुलान, छपाडू सहित आधा दर्जन अन्य इलाकों से चलकर चंडी मां के भक्त नुकनाली मंदिर में पहुंचेंगे। डुग्गन से भद्रवाह की ओर रिहायश से दूर बर्फ से लदकद पहाड़ों की यह दुर्गम यात्रा कई सदियों से जारी है। ऐसा माना जाता है कि बनी और डुग्गन में बने चंडी मां के मंदिर नुकनाली से ही होकर जाते हैं। परंपरा के अनुसार नुकनाली में श्रद्धालुओं की भारी आस्था है। इंतजामों के अभाव में भक्तों के लिए विभिन्न स्थानों पर चंडी माता के मंदिरों का निर्माण करवाया गया है। गत सालों में श्रद्धालुओं का आंकड़ा बढ़ा है। औसतन दस से पंद्रह हजार श्रद्धालु इस वार्षिक यात्रा में हिस्सा लेते हैं।
अनहोर के जंगलों में रातभर लगता है मेला
बनी और डुग्गन के विभिन्न इलाकों से हजारों श्रद्धालु एक साथ हर साल नुकनाली के लिए रवाना होते हैं। प्रशासन द्वारा इंतजामों के अभाव में स्थानीय लोग यात्रा मार्ग पर आधा दर्जन के करीब जगह पर लंगर लगाते हैं। ढाडू, अनहूर, नुकनाली, लम्मी तलाई में लंगर लगाया जाता है। श्रद्धालुओं का पहला पड़ाव अनहोर हैं, जहां स्थानीय लोगों के सहयोग से लंगर की व्यवस्था की जाती है। गर्मियों में खाना बदोशों की रिहाइश अनहोर में इन दिनों कोई भी नही रहता। ऐसे में जहां महिलाओं और बच्चों के लिए स्थानीय लोगों के सहयोग से एक शेड बनाया गया है वहीं हजारों भक्तों को जंगल के घने पेड़ों की ओट में ही रात गुजारते हैं। भक्त रात गुजारने के लिए महामाई का गुणगान करते हैं और लंगर कमेटी द्वारा पर्दे पर दिखाई जाने वाली रामायण से रात गुजारते हैं। जिसके बाद अलसुबह यह यात्रा नुकनाली के लिए रवाना होती है। नुकनाली में सभी यात्राओं का मिलन होता है और माता के दर्शन यह दोपहर बारह बजे से पहले सभी यात्राएं वापस रवाना हो जाती हैं।