कठुआ। रंजीत सागर झील के जम्मू-कश्मीर के हिस्से से इस साल मछली पकड़ने की एवज में एक करोड़ 46 लाख रुपये की राशि निर्धारित की गई है। वहीं पहली बार देश के किसी भी कोने से ठेकेदारों को इस निविदा प्रक्रिया में मछलीपालन विभाग ने आमंत्रित किया है। 19 अगस्त तक आवेदन किया जा सकता है, जबकि 20 को निविदा खोली जाएंगी।
जम्मू-कश्मीर सरकार के पास रंजीत सागर जलाशय का लगभग 58 फीसदी से अधिक हिस्सा है, जबकि पंजाब के पास 35 फीसदी और शेष हिमाचल के हिस्से आता है। 87 वर्ग किलोमीटर में फैली हिमाचल, जम्मू-कश्मीर और पंजाब की सीमा पर यह झील अनुछेद 370 हटनेके बाद प्रदेश सरकार के लिए राजस्व का एक बड़ा जरिया भी बनी है। दरअसल अनुछेद 370 की समाप्ति के बाद लाखों में होने वाली इस झील से मछली निकालने की बोली प्रक्रिया अब करोड़ों में पहुंच गई है।
मछलीपालन विभाग के सहायक निदेशक पवन शर्मा ने बताया कि बीते साल के राजस्व से दस प्रतिशत अधिक राशि इस बार की न्यूनतम बोली निर्धारित की गई है। ऐसे में इस बार इच्छुक आवेदकों को एक करोड़ 46 लाख से अधिक की बोली लगानी होगी। उन्होंने बताया कि अगले कुछ दिनों में विभाग बड़े पैमाने पर रंजीत सागर झील में अलग अलग वैराइटी की मछलियों की स्टॉकिंग भी करने जा रहा है। उन्हाेंने बताया कि पहली और दूसरी निविदा को निदेशालय में खोला गया है, जिसमें रूझान कम देखने को मिला है। उम्मीद है कि इस प्रक्रिया में न सिर्फ जम्मू कश्मीर, बल्कि देश के अन्य हिस्साें से भी लोग इसमें भाग लेंगे। ज्ञात रहे कि वर्ष 2021 में मछली निकालने के ठेके से 52 लाख, जबकि वर्ष 2022 में एक करोड़ 22 लाख रुपये की राशि सरकार के खजाने में आई थी। बीते साल यह प्रक्रिया एक करोड़ 33 लाख में पूरी हुई थी।