कठुआ। शहर के श्री महाकालेश्वर शिवदुर्गा मंदिर में 11 दिन से जारी शिव महापुराण की कथा का समापन हो गया है। रविवार को कथा के संपन्न होने के बाद भंडारे का आयोजन किया गया। इसमें हजारों की संख्या में भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया।
अंतिम दिन कथा के दौरान कथावाचक मनोहर लाल शास्त्री ने शिव पुराण में वर्णित शिव के जीवन चरित्र पर प्रकाश डालते हुए उनके रहन-सहन, विवाह और उनके पुत्रों की उत्पत्ति के विषय में भक्तों को जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भगवान शिव को त्रिदेवों में संहार का देवता भी माना गया है लेकिन वह सदैव लोकोपकारी और हितकारी हैं। शिवोपासना को अत्यंत सरल माना गया है। लिहाजा हमें उत्तम फलदायी भगवान शिव की उपासना और कथा का श्रवण अवश्य करना चाहिए।
उन्होंने बताया कि श्रावण मास महादेव का सबसे प्रिय महीना माना जाता है क्योंकि अपने दूसरे जन्म में देवी सती ने राजा हिमाचल और रानी मैना के घर में पार्वती के नाम से पुत्री के रूप में जन्म लिया। युवावस्था में श्रावण महीने के दौरान ही माता पार्वती ने निराहार रहकर कठोर व्रत किया और भोले बाबा को प्रसन्न कर उन्हें पति के रूप में वरण किया। तब से ही महादेव की सिद्धी के लिए यह महीना विशेष हो गया है। उन्होंने कहा कि श्रावण महीने में भोले शंकर की पूजा और उनकी कथा सुनने से हमें कई जन्मों के पापों से मुक्ति मिल सकती है। भगवान इस माह में अपने भक्तों पर विशेष कृपा करते हैं, लिहाजा हमें इस महीने में उनकी कथा का श्रवण अवश्य करना चाहिए।