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Kathua News: ऊपर से गुजर जाएंगी पस्सियां, ढांचे के बीच से चलेंगे वाहन

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कठुआ। किन्हीं कारणों से मुकदमेबाजी में अटके बनी-बसोहली मार्ग पर सूखा नाले के पुल के लिए केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्रालय अब दूसरी व्यवस्था करने में जुट गया है। मामला सुलझने तक अब एक वैकल्पिक ढांचे पर काम करने के निर्देश दिए गए हैं।
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इसके तहत सूखे नाले में आने वाले मलबे को अब ढांचे के ऊपर से गुजार दिया जाएगा। वहीं पानी की निकासी का अतिरिक्त प्रबंध किया जाएगा। यही नहीं, मौसम खराब होने पर वाहनों को अब घंटों का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। इसके लिए सीमा सड़क संगठन ने मुंबई की एक कंपनी को योजना तैयार करने के निर्देश भी जारी कर दिए हैं। बाकायदा इस परियोजना को आईआईटी मुंबई की ओर से वेट किए जाने यानी सुरक्षित घोषित किए जाने के बाद उनकी ही निगरानी में काम भी शुरू करने की योजना है।
सूखा नाले में साल के 12 महीने जब भी बारिश होती है, मलबा आना आम बात है। यहां आने वाली पस्सियाें की जगह लगातार मलबे के नीचे से गुजर रहा पानी आए दिन वाहनों के लिए दिक्कत भी बनता है। ऐसे में इस परियोजना के पूरा होने से एक बड़े इलाके को भी राहत मिलने की उम्मीद है। बनी सब डिवीजन के लोगों के लिए इस रास्ते के बंद होने के बाद हिमाचल और पंजाब से होकर कठुआ पहुंचना एक मजबूरी बन जाता है। खास तौर से आपात हालात में यह और भी खतरनाक हो जाता है। 128 किलोमीटर लंबे बनी- बसोहली-भद्रवाह मार्ग 80 के दशक में बीआरओ को सौंपा गया था। इसके बाद बसोहली से बनी तक सड़क पर तारकोल डाला गया था। लेकिन पर्यटन को बढ़ावा देने और मार्ग के विस्तारीकरण को लेकर शुरू की गई कवायद अभी भी पूरी नहीं हो पाई है। वर्ष 1974 के दौरान इस सड़क के निर्माण का काम लोक निर्माण विभाग को सौंपा गया था। इसके बाद वर्ष 1984 में तत्कालीन मुख्यमंत्री सहित पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इस सड़क के निर्माण को ग्रेफ के अधीन करने की घोषणा की। इसके बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद ने भी अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान अतिरिक्त राशि उपलब्ध करवा इस मार्ग को पूरा करने के निर्देश जारी किए थे। वर्ष 2007 में क्षेत्र के विकास के लिए और पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए सरथल मेले का भी आयोजन किया गया, लेकिन सड़क सुविधा सुचारु न होने से पर्यटकों को रिझाना दूर की कौड़ी साबित हुआ। वर्तमान में स्थिति यह है कि सर्दियों की शुरुआत और बरसात के दिनों में जहां बनी-भद्रवाह मार्ग बंद रहता है तो दूसरी ओर बसोहली-बनी मार्ग की स्थिति भी कुछ बेहतर नहीं है। सड़क विस्तारीकरण के बीच पस्सियां गिरने से आए दिन यह मार्ग घंटों बंद रहता है। बनी, ढग्गर जैसे इस इलाके की लाइफलाइन यह सड़क संपर्क पूरा होना आज भी इलाके के लोगों का सपना है। सूखा नाले में पस्सियां चलने से यह मार्ग बरसात के दिनों में कई कई घंटे बंद रहता है। आलम यह है कि 45 साल बीत जाने के बाद भी बसोहली-बनी-भद्रवाह राजमार्ग विस्तारीकरण और संपर्क को सुचारु रखने का सपना अभी पूरा नहीं हुआ है।
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सूखा नाले में पूर्व का कांट्रेक्ट मुकदमेबाजी में चला गया है। मुंबई की एक कंपनी से इस परियोजना के लिए वैकल्पिक प्रपोजल मांगा गया है। इसे आईआईटी मुंबई की ओर से सुरक्षित घोषित करने के बाद उसकी निगरानी में ही काम किया जाएगा। उम्मीद है कि मार्च अप्रैल में यह काम शुरू होगा और 2026 से पहले इसे पूरा कर लिया जाएगा। परियोजना डिजाइन स्टेज पर है।
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-भुवन लाल शाह
ओसी ग्रेफ, 69आरसीसी
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