कठुआ। नवजात शिशुओं को क्रिटिकल केयर के साथ-साथ अब इलाज के लिए विशेषज्ञों की राय भी जीएमसी कठुआ में ही हासिल हो जाएगी। इससे बाल चिकित्सा आयु वर्ग के बीच रुग्णता और मृत्यु दर में कमी लाने में संस्थान को एक बड़ी कामयाबी मिलने की उम्मीद है।
इससे जीएमसी कठुआ से नवजात शिशुओं को अब रेफर कर एसएमजीएस अस्पताल जम्मू भेजने के मामलों में भी कमी आएगी। एसएमजीएस के नियोनेटोलॉजिस्ट अब टेलीमेडिसिन सुविधा के जरिए ऑनलाइन जीएमसी कठुआ के लिए चौबीस घंटे उपलब्ध रहेंगे। स्क्रीन पर शिशुओं को आ रही दिक्कतों को देखने और निर्देश देने के साथ ही वे जीएमसी कठुआ के डॉक्टरों को जटिल मामलों में भी परामर्श उपलब्ध करवाएंगे। ऐसे में जिले के दूरदराज इलाकों से जीएमसी कठुआ में बाल चिकित्सा की आस में आने वाले लोगों के लिए भी यह एक बड़ी सुविधा होने जा रही है।
दरअसल, जीएमसी कठुआ में हर महीने औसतन 500 के लगभग प्रसव करवाए जाते हैं। इनमें नार्मल और सिजेरियन दोनों तरह के हैं। रोजाना होने वाले 15 से 20 प्रसव के बीच कुछ मामले ऐसे भी आते हैं, जो गंभीर होते हैं। यहां तक कि कुछ मामलों में समय से पहले जन्मे बच्चों में दिक्कतें बढ़ जाती हैं। उन्हें नियोनेटोलॉजिस्ट की देखरेख की जरूरत होती है। कठुआ जीएमसी में यह विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं है। लिहाजा गंभीर मामलों को एसएमजीएस अस्पताल जम्मू रेफर कर दिया जाता है। कुछ मामलों में जम्मू पहुंचते तक हालात और भी बिगड़ जाते हैं। ऐसे में टेलीमेडिसिन की इस सुविधा से जीएमसी कठुआ में ही उपचार भी संभव हो जाएगा। जीएमसी प्रशासन के अनुसार गंभीर मामलों को भी रेफर करने से पहले स्टेबल किया जा सकेगा।
एसएमजीएस अस्पताल जम्मू को जम्मू प्रांत के परिधीय अस्पतालों और नव स्थापित सरकारी मेडिकल कॉलेजों में बाल चिकित्सा आईसीयू की निगरानी और मार्गदर्शन के लिए बाल चिकित्सा उत्कृष्टता केंद्र (सीओई) की स्थापना के लिए नामित किया गया है। यहां से विशेषज्ञ डॉक्टर अब टेलीमेडिसिन की सेवाएं दे रहे हैं। इसी कड़ी में एसएमजीएस जम्मू में टेलीमेडिसिन पोर्टल के माध्यम से नियोनेटोलॉजिस्ट के साथ संचार स्थापित कर नवजात शिशुओं को बेहतर देखभाल देने में बाल रोग विभाग जीएमसी कठुआ की ओर से शुरुआत की गई है। जीएमसी कठुआ के प्रधानाचार्य डॉ. सुरिंदर अत्री के मार्गदर्शन और एचओडी बाल रोग डॉ. वरिंदर कुमार, अधीक्षक, उपाधीक्षक, डॉ. सुदेश मन्हास, डॉ. कार्तिक संब्याल और एनआईसीयू स्टाफ के समर्थन के साथ, जीएमसी कठुआ के एसएनसीयू वार्ड में आठ दिन के नवजात को पहला टेली परामर्श प्रदान किया गया। प्रधानाचार्य ने बताया कि यह पहल एसएमजीएस जम्मू में स्थापित बाल चिकित्सा उत्कृष्टता केंद्र का एक हिस्सा है और नए मेडिकल कॉलेजों को कवर करती है और जीएमसी कठुआ के बाल रोग विभाग में नवजात शिशुओं को उच्च गुणवत्ता की देखभाल देने में मदद करेगी।