कठुआ/हीरानगर। जिले के मैदानी इलाकों में मंगलवार तड़के भारी बारिश हुई। इससे कई जगह भूस्खलन हुआ और सड़कों पर पस्सियां गिर गईं, जिससे यातायात प्रभावित हो गया। इसके अलावा तीन मकानों की चहारदीवारी गिर गई, जबकि कंडी इलाके में इससे दोगुनी बारिश ने सामान्य जनजीवन बुरी तरह प्रभावित किया।
दियालाचक छलां मार्ग पर जहां बाढ़ से घंटों यातायात बाधित रहा, वहीं बनी-बसोहली को जोड़ने वाले मुख्य मार्ग पर भी करडोह के नजदीक पस्सियां गिरने से वाहन फंसे रहे। उधर, कठुआ से सटे शेर कोटला में एक मकान के नजदीक नाले के उफान पर आने से परिवार के सदस्यों ने जहां मुश्किल से जान बचाई, वहीं बाढ़ का पानी भी उनके आंगन में जा घुसा। कुमरी-कठेरा मार्ग पर कठुआ की ओर आ रहे छात्रों से भरी एक मिनी बस भी हादसे का शिकार होते होते बची। वाहन के सौ मीटर आगे और पीछे दोनों ओर पस्सियां गिर गईं। इसके बाद छात्रों ने पैदल ही रास्ते को पार किया। इस दौरान कठुआ शहर में 39.5 एमएम और हीरानगर में 121 एमएम बारिश दर्ज की गई।
भारी बारिश के चलते बिजली ढांचे को भी भारी नुकसान पहुंचा है। कई जगह बाढ़ की चपेट में आने से जहां खंभे और बिजली के तार क्षतिग्रस्त हुए हैं तो वहीं ट्रास्फार्मर भी ठप होकर रह गए हैं। उधर, बारिश हीरानगर के इलाकों में भी आफत बनकर बरसी है। नदी नालों में उफान से कई क्षेत्रों में बाढ़ जैसे हालात बन गए। डिंगा अंब तहसील में पड़ता नाला ठंगर इलाके में भूस्खलन से तीन घरों में मलबा भर गया। इससे घरों की दीवारें और चारदीवारी टूट गई। इसी क्षेत्र में गुज्जरों के तीन कच्चे मकानों को भी नुकसान पहुंचा है। गनीमत यह रही कि किसी भी तरह के जानी नुकसान नहीं हुआ है। प्रशासन की टीमें नुकसान का आकलन कर रिपोर्ट तैयार करने में जुट गई हैं। उधर, भूस्खलन और प्रांजली नाले में पानी के तेज बहाव से अस्थायी रास्ता बहने के कारण दयाला चक बिलावर सड़क पर आठ घंटे तक वाहनों की आवाजाही ठप रही। इसकी वजह से स्कूली बच्चों और शिक्षकों को घर वापस लौटना पड़ा। वहीं तरनाह नाले ने भी अपना रौद्र रूप दिखाया। तेज बहाव में बिजली के कई खंभे बह गए, जिसकी वजह से कई इलाकों में बिजली आपूर्ति ठप हो गई है।