50 दिनों बाद मौसम बदला, तो किसानों को उम्मीद थी कि अच्छी बारिश होगी। लेकिन मैदानी इलाकों में मात्र दो एमएम बारिश हुई। इससे पहले 27 फरवरी को एक एमएम और 23 जनवरी को 10 एमएम बारिश दर्ज की गई थी, जो नहीं के बराबर है। पिछले 50 दिनों का सीजन फसल की उर्वरता को बढ़ाने में सहायक होता है, लेकिन ड्राई सीजन ने किसानों की कमर तोड़ कर रख दी है।
एक ओर जहां तेला कीट के हमले से फसल खराब हो रही है, वहीं पर्याप्त बारिश न होने से गेहूं की बालियां भी इस बार खाली रही हैं। कृषि विज्ञान केंद्र कठुआ के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. विशाल महाजन ने बताया कि फसल इस समय क्रिटिकल स्टेज में है। कंडी के इलाकों में फसलों को सबसे ज्यादा नुकसान का अनुमान है। इसका असर दिखना भी शुरू हो गया है। उधर, पूर्वानुमान के अनुसार अगले दो दिन तक बारिश का अनुमान है।