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सिंचाई के लिए नहरों से पानी न मिलने पर किसानों ने कार्यकारी अभियंता का किया घेराव

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हीरानगर। नहरों से खेतों की सिंचाई के लिए पानी न मिलने से गुस्साए किसानों ने वीरवार को रावी तवी विभाग के कार्यालय में खूब हंगामा किया। लोगों ने गेट बंद कर कार्यकारी अभियंता को कार्यालय में नहीं जाने दिया, और उन्हें पैदल साथ ले जाकर खाली पड़ी नहरों की हालत दिखाई। बाद में उन्हें खेतों में ले जाकर पर्याप्त पानी न मिलने से खराब हुई धान की फसल भी दिखाई।
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वीरवार को सुबह करीब 11 बजे अर्जुन चक गांव के किसान विभाग के कार्यालय में पहुंचे। वहां कोई अधिकारी मौजूद न होने पर उन्होंने नारेबाजी शुरू कर दी। किसानों के समर्थन में आए डीडीसी सदस्य अभिनंदन शर्मा ने फोन करके कार्यकारी अभियंता को किसानों की समस्या सुनने के लिए बुलाया। कार्यकारी अभियंता करीब ढाई घंटे बाद कार्यालय पहुंचे तो किसानों का गुस्सा और बढ़ गया, और उन्होंने उनका घेराव कर लिया। उनके खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
अभियंता जैसे ही अपने कमरे की ओर जाने लगे तो किसानों ने गेट को बंद कर दिया। मौके पर मौजूद स्थानीय सरपंच राकेश खजूरिया ने कहा कि कुछ समय पहले भी किसानों ने कार्यालय में आकर अपना रोष व्यक्त किया था। लेकिन, इसके बावजूद भी विभाग के अधिकारियों की नींद नहीं खुली। उज्ज दरिया से आने वाली नहर में पानी खतरे के निशान से ऊपर बह रहा है, लेकिन फिर भी हमारी नहर को बंद किया गया है। जिसकी वजह से किसानों को खेतों की सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल रहा। धान की फसल लगाने में देरी हो रही है। पनीरी भी पूरी तरह से पीली पड़ चुकी है। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों की आय दोगुनी करने की बात कर रही है, लेकिन यहां हालात उसके विपरीत हैं।
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वहीं, इस मौके पर डीडीसी सदस्य ने कहा कि विभाग के अधिकारियों के लचर रवैए और लापरवाही को लेकर वह उच्च अधिकारियों को लिखित में शिकायत करेंगे। अभियंता की ओर से दो घंटे के भीतर पानी छोड़ने के आश्वासन के बाद किसान शांत हुए और घर को लौट गए।
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उज्ज नहर में पर्याप्त पानी है तो लगातार मिलेगा पानी
उज्ज नहर में पूरा पानी न मिलने के कारण इस तरह की समस्या पैदा हुई। लेकिन, अब नहर में पर्याप्त पानी मिल रहा है, जिसके बाद किसानों को भी लगातार पानी मिल जाएगा। मैंने लोगों के साथ जाकर नहरों की हालत देखी, जिनकी सफाई का काम नहीं हुआ है। पंचायत प्रतिनिधि लिखकर दें, तो हम उस ठेकेदार का मेहनताना नहीं देंगे। कार्यालय के भीतर न जाने देने का लोगों का गुस्सा जायज था। गुस्से में ही उन्होंने यह किया। लेकिन मुझे कोई शिकायत नहीं है।
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- प्रदीप गुप्ता, कार्यकारी अभियंता।
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