कठुआ। सालों से पेयजल समस्या का सामना कर रहे वार्ड 17 की एसएसी बस्ती के लोगों ने जल शक्ति विभाग के खिलाफ कड़ा रोष जताया है। बुधवार को दर्जनों की संख्या में स्थानीय लोगों ने विभाग के खिलाफ नारेबाजी करते हुुुए अपना गुस्सा जाहिर किया और चेतावनी दी कि अब अगर उनकी समस्या का समाधान नहीं किया गया तो विभाग के अधिकारियों का घेराव करने से भी पीछे नहीं हटेंगे।
प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व कर रहे वार्ड के पार्षद जोगिंदर कुमार ने कहा कि करीब पचास वर्ष पूर्व मानके तलाब में बने ट्यूबवेल से पानी की सप्लाई होती है। लेकिन, ट्यूबवेल के निर्माण के दौर में लगाई गई पाइप लाइनें लोगों की प्यास नहीं बुझा पा रहीं। क्योंकि, जब इन पाइपों को लगाया गया था तब मोहल्ले में मात्र दस से पंद्रह घर थे। लेकिन, अब उसी मोहल्ले में दो सौ से ज्यादा घर हो गए। ऐसे में विभाग की पाइपें अब बढ़ी हुई आबादी की प्यास नहीं बुझा पाती हैं।
उन्होंने कहा कि मोहल्ले में रहने वाले ज्यादातर लोग गरीब हैं, जिन्हें विभाग के पब्लिक स्टैंड से ही पानी मिलता है। लेकिन, यहां तीन से चार दिन के बाद जब पानी आता है, तो उसका प्रेशर इतना कम होता है कि मात्र एक-दो बाल्टी पानी ही भर पाता है। वार्ड में लगे वाल्व से हर समय लीक होता पानी ठीक करने के लिए विभाग के पास कोई प्रावधान नहीं है। ऐसा लगता है कि विभाग ने वार्ड में पानी के कनेक्शन स्थानीय लोगों से सिर्फ राजस्व वसूलने के लिए लगाए हैं। अब भी वार्ड में सैकड़ों घर ऐसे हैं, जहां उनके नलों से पानी की बूंद भी नहीं टपकती।
जोगिंदर कुमार ने बताया कि इस समस्या के बारे में अपने दो साल केे कार्यकाल के दौरान दर्जनों बार विभाग के अधिकारियों से मिल कर समस्या का समाधान करने की मांग कर चुके हैं, लेकिन विभाग अपनी कार्यप्रणाली को नहीं सुधार रहा। हालत यह है कि नगर परिषद ने वार्ड में नई पाइप लाइन बिछाने के लिए कुछ फंड भी मंजूर किया है, लेकिन इस काम को भी विभाग ने अधर में लटकाया हुआ है। जिससे, वार्ड की गली और नालियों के विकास कार्य भी प्रभावित हो रहे है।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अभी तक कोरोना को देखते हुए वह आवाज नहीं उठा रहे थे। लेकिन, अब सब्र नहीं किया जा सकता। अगर विभाग ने जल्द समस्या का समाधान नहीं किया तो लोग उग्र हो सकते हैं। इसका जिम्मेदार खुद विभाग ही होगा।