जम्मू और कश्मीर संभाग में भेदभाव की मिसाल बने बीएड पाठ्यक्रम पर विद्यार्थी वर्ग में भी खासा रोष है। वीरवार को स्टूडेंट्स सोशलिस्ट फेडरेशन (एसएसएफ) के बैनर तले बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने सरकार की नीति के खिलाफ प्रदर्शन कर रोष जताया।
जिला सचिवालय के बाहर प्रदर्शन करते हुए उन्होंने तत्काल प्रभाव से फैसला वापस लेने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व करते हुए एसएसएफ के अध्यक्ष हरमीत सिंह चिंपू ने कहा कि जम्मू-कश्मीर सरकार ने जम्मू के साथ भेदभाव किया है।
सत्र 2015-16 के लिए कश्मीर में बीएड का पाठ्यक्रम एक वर्ष का है, जबकि जम्मू में दो वर्ष का किया गया है। उन्होंने कहा कि भाजपा ने भेदभाव का रोना रोकर सत्ता हासिल की, लेकिन अब वही भेदभाव कर रही है।
उन्होंने कहा कि सरकार को चाहिए कि तुरंत इस पाठ्यक्रम को एक वर्ष का किया जाए। इससे न केवल युवा वर्ग को नुकसान है, बल्कि स्थानीय कारोबार को भी धक्का लगेगा। उन्होंने कहा कि सत्र में जम्मू के बीएड कॉलेज तालाबंदी की कगार पर पहुंच जाएंगे और बाहरी लोग कश्मीर में जाने से परहेज करेंगे।
सरकार ने कश्मीर संभाग को बढ़ावा देने के लिए ऐसी योजना तैयार की है जिससे विद्यार्थियों का भविष्य अंधकारमय हो गया है। एक ही राज्य में इस तरह की दो नीतियां समझ से परे हैं। प्रदर्शन में रंदीप सिंह, अनमोल शर्मा, मृदुल शर्मा, पुष्कर परोच, तेजिंदर सिंह, दानिश शेख, राहुल मोहित आदि लोग शामिल रहे।