कठुआ। जिले के निचले इलाके में गेहूं की फसल तैयार हो गई, लेकिन किसान पसोपेश में हैं कि कैसे इन फसलों की कटाई की जाए और कैसे इन्हें बेचकर अपने परिवार के लिए रोजी रोटी निकाली जाए। कीड़ियां-गंडियाल के साथ-साथ कठुआ शहर से सटे बीस किलोमीटर के दायरे का क्षेत्र कृषि प्रधान है। इन इलाकों में नवंबर में हुई बारिश से धान की फसल भी बर्बाद हो चुकी है, ऐसे में किसानों के लिए एकमात्र यही सहारा है कि इस बार की फसलों की कटाई समय पर हो। किसानों का आरोप है कि सरकार की ओर से कृषि क्षेत्र से संबंधित आदेश सिर्फ कागजों तक ही सीमित दिखाई दे रहे हैं। न तो किसानों को रीपर उपलब्ध हो पा रहे हैं और न ही लेबर। हालात ये हैं कि पकी हुई फसल की कटाई में देरी होती जा रही है, ऊपर से मौसम किसानों को बार-बार परेशान कर रहा है।
नगरी के किसानों ने सरकार से गुहार लगाई है कि निर्देशों से कर्मचारियों को भी अवगत करवाया जाए, चूंकि अधिकतर किसान इन दिनों अपने खेतों तक जाने के लिए परेशानी झेल रहे हैं। पंजाब से कंबाइन से लेकर रीपर मंगवाने और व्यवसायियों को आने की भी जल्द अनुमति देने की मांग की गई है।
-----------------------
कोट्स
रविवार को 12 कंवाइनों और ऑपरेटरों को प्रशासन की ओर से पास मुहैया करवाए गए हैं। नगरी के कुछ इलाकों में कटाई का काम भी शुरू कर दिया गया है। नगरी, भजवाल, पल्ली, मढ़ीन, जखबड़, छन्न अरोड़ियां, कुंदे चक, डुंगाडा में गेहूं खरीद केंद्र सक्रिय किए जा रहे हैं। पंजाब से भी व्यवसायियों को फसल की खरीदारी के लिए आने की अनुमति रहेगी, लेकिन इस सब में विशेष ध्यान रखा जाएगा कि किसी भी प्रतिबंधित रेड जोन से कोई भी ऐसी मूवमेंट न हो।
- विजय उपाध्याय, मुख्य कृषि अधिकारी, कठुआ।
.............
जिले में सक्रिय हो रहे आठ गेहूं खरीद केंद्र
प्रशासन की योजना, न्यूनतम समर्थन मूल्य से वंचित न हों किसान
कठुआ। मुख्य कृषि अधिकारी विजय उपाध्याय के मुताबिक कृषि विभाग ने किसानों की सहूलियत के लिए लॉकडाउन के बीच आठ गेहूं खरीद केंद्रों को जिले में सक्रिय करने की तैयारी पूरी कर ली है। शनिवार को उच्च स्तरीय बैठक में फैसले के बाद धान खरीद केंद्रों को ही गेहूं खरीद केंद्रों के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। ऐसा पहली बार है कि किसान इन खरीद केंद्रों में अपनी फसलों को उचित दाम, यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य या उससे अधिक में बेच पाएंगे। इससे पहले जिले में सिर्फ धान की खरीदारी ही मंडियों में होती रही है। कठुआ पंजाब से सटा होने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर गेहूं की मांग को देखते हुए किसानों को अब तक अच्छे दाम मिलते रहे हैं। कृषि विभाग ने एसएसपी और डीसी से मिलकर कंबाइन, रीपर से लेकर पंजाब के व्यवसायियों को भी आने की अनुमति दिए जाने के संबंध में मांग उठाई है। कृषि संबंधित गतिविधियों को केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से जारी निर्देशों में छूट के दायरे में लाया गया है। जिले में 15 के लगभग कंबाइन और दस के लगभग रीपर उपलब्ध हैं, जिनका मुख्य तौर पर अंदड के नगरी, कीड़ियां गंडियाल, मढ़ीन और हीरानगर के इलाकों में बीस हजार हेक्टेयर फसल की कटाई के लिए प्रयोग किया जाना है। कमी न हो इसके लिए पंजाब से भी कंबाइन और रीपर लाने के लिए पास मुहैया करवाए जा रहे हैं। इन्हें जम्मू संभाग के अन्य हिस्सों में भी इस्तेमाल किया जाएगा।