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परीक्षाओं का दौर लगभग समाप्त हो चुका है और स्कूलों में एडमिशन का दौर शुरू हो चुका है। ऐसे में अब अभिभावकों की परेशानी भी शुरू हो चुकी है। बच्चों की फीस से लेकर उनकी वर्दी, पुस्तकें आदि का खर्च अभिभावकों के लिए परेशानी बन गया है।
शिक्षा विभाग द्वारा निजी स्कूलों पर दाखिला फीस और प्रति महीने ली जाने वाली फीस पर लगाम नहीं होना अभिभावकों के लिए परेशानी का बड़ा कारण है। शहर के निजी स्कूलों में बच्चों को पढ़ा रहे अभिभावकों ने बताया कि नियम न होने का लाभ स्कूल प्रबंधन उठाता है। हर महीने हजारों रुपये ऐंठे जाते हैं। अभिभावकों ने बताया कि नर्सरी कक्षा में ही निजी स्कूल में दाखिला करवाने के लिए दस से बीस हजार रुपये पहले महीने में ही ले लिए जाते हैं।
शिक्षा विभाग के एक कर्मचारी ने बताया कि सभी निजी स्कूलों को फीस स्ट्रक्चर का ब्यौरा मुख्य शिक्षा अधिकारी कार्यालय में जमा करवाना होता है। सभी निजी स्कूलों ने अपने हिसाब से फीस का ब्यौरा बनाया है। इसमें दो सौ से लेकर बारह सौ रुपये प्रति महीना फीस का प्रावधान निजी स्कूलों का है।
अभिभावकों का कहना है कि सालाना फीस और मंथली फीस के बाद निजी स्कूल वर्दी, पुस्तकें आदि के लिए भी कहते हैं। इसके लिए हजारों रुपये लिए जाते हैं।
वार्ड दो निवासी राममूर्ति ने बताया कि पिछले दिनों उन्होंने अपनी बेटी का दाखिला शहर के एक निजी स्कूल में करवाया। स्कूल प्रबंधन ने एडमिशन के नाम पर करीब तेरह हजार रुपये लिए।
पूछे जाने पर बताया गया कि इसमें स्कूल की वर्दी, एडमिशन फीस, किताबें, परीक्षा फीस शामिल है। हालांकि, स्कूल प्रबंधन ने कहा कि हर महीने स्कूल फीस देनी होगी।