कठुआ में जुमें की नमाज अदा करते हुए रोजेदार। संवाद
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कठुआ। माह-ए-रमजान के दूसरे जुम्मे पर जिले में अकीदतमंदों ने पूरे उत्साह व उमंग के साथ नमाज अदा कर अमन-चैन की दुआ मांगी। कठुआ से लेकर बनी, बिलावर से लेकर बसोहली की मस्जिदों में रोजेदारों ने नमाज अदा की।
इस दौरान रोजेदारों ने अल्लाह से बरकत की दुआ मांगते हुए उनकी रहमत के लिए उनका खैर मकदम किया। जुमें की नमाज अदायगी के मौके पर मुख्यालय स्थित जामा मस्जिद से अपने तकरीर में मौलाना जकरिया ने माह-ए-रमजान और रोजे के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि माह-ए-रमजान का रोजा दु:ख और गरीबी का एहसास कराने के अलावा शारीरिक कष्ट को भी दूर करता है। रोजा रखने वालों को किसी प्रकार की नुमाइश नही करनी चाहिए। रमजान का मुबारक माह मुस्लिम भाइयों के जीवन में शालीनता, सहनशीलता को निखारता है। रोजा रखने वाले व्यक्तियों का चेहरा हमेशा ही स्वच्छ व निर्मल होना चाहिए। माह-ए-रमजान में एक माह तक रोजा रखने से व्यक्ति के पूरे साल का शारीरिक कष्ट स्वयं दूर हो जाता है। इस कारण धनवान, निर्धन, कमजोर एवं बलवान सभी अल्लाह की राह में रोजा रखकर भूख और प्यास का एहसास करते हैं। इस्लामिक मान्यता के मुताबिक अगर कोई इंसान रमजान के दूसरे अशरे में अपने गुनाहों से माफी मांगता है, तो दूसरे दिनों के मुकाबले इस समय अल्लाह अपने बंदों को जल्दी माफ करता है। मौलाना ने बताया जिसने रोजे और नमाज की अहमियत समझ ली, उसने जिंदगी में सुकून हासिल कर लिया। मौलाना ने बताया कि जन्नत का हकदार वही है, जो ईमान पर चल रहा है। नमाज अल्लाह के करीब लाती है। उन्होंने कहा कि रोजा अल्लाह का शुक्रिया अदा करने का मौका देता है। ईमान वाला इंसान ही अल्लाह को पसंद है।