जम्मू से कठुआ तक के क्षेत्र को इंडस्ट्रियल कॉरीडोर के रूप में विकसित करने की तैयारी के बीच प्रदूषण की चुनौती का बढ़ना लाजमी हो गया है।
कठुआ के औद्योगिक क्षेत्र में बड़ी संख्या में नई इकाइयों को स्थापित किया जा चुका है। हजारों कनाल भूमि का अधिग्रहण कर घाटी औद्योगिक क्षेत्र भी उद्योग धंधों के लिए तैयार होने जा रही है। ऐसे में प्रदूषण नियंत्रण को लेकर अभी से चिंताएं उठने लगी हैं।
दरअसल मौजूदा औद्योगिक क्षेत्र शहर की उत्तर दिशा में स्थित है। शहर के बिल्कुल नजदीक स्थित औद्योगिक क्षेत्र से स्थानीय जनजीवन को कई परेशानियां सामना करना पड़ रहा है। जम्मू से लेकर कठुआ तक के इलाके को उद्योग मंत्री ने इंडस्ट्रियल कॉरीडोर के रूप में विकसित करने पर जोर दिया है।
मंत्री के अनुसार हर औद्योगिक क्षेत्र में कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित होंगे। लेकिन मजेदार बात है कि वर्तमान में सैकड़ों छोटी बड़ी औद्योगिक इकाइयां चलने के बावजूद कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट को स्थापित करना मुमकिन नहीं हो पाया है।
ऐसे में औद्योगिक क्षेत्र से बहकर आने वाली गंदगी शहर के बीच से होकर गुजरती है। एक तरफ वायु प्रदूषण तो दूसरी तरफ जल प्रदूषण की समस्या बनी हुई है, जिसे नियंत्रित करने के तमाम दावे खोखले साबित होते हैं।