कठुआ। संसद में महिलाओं को दो तिहाई आरक्षण देने वाले विधेयक को लेकर महिलाओं में खुशी है। राजनीतिक पार्टियों से जुड़ी महिलाओं ने इसको लेकर अलग-अलग प्रतिक्रिया दी है। भाजपा से जुड़ी महिलाओं ने जहां महिला आरक्षण को अनुच्छेद 370 तोड़ने जैसा ऐतिहासिक फैसला बताया तो वहीं डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव आजाद पार्टी से जुड़ी महिला नेता ने भी इसे स्वागत योग्य फैसला बताया। हालांकि, कांग्रेस नेता ने इसे सुर्खियां बटोरने का बहाना बताया है। उनका कहना है कि अगर केंद्र सरकार महिलाओं को असल में आरक्षण देना चाहती है तो इसे जल्द लागू किया जाए। इसकी घोषणा को चुनाव घोषित होने तक टाला न जाए।
प्रधानमंत्री मोदी के शासनकाल में महिलाओं को मिला सम्मान
भाजपा महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष सुषमा शर्मा ने कहा कि अनुच्छेद 370 तोड़ने के बाद महिलाओं को आरक्षण देना मोदी सरकार का ोऐतिहासिक फैसला है। सरकार हर वर्ग को ध्यान में रखकर फैसले ले रही है। पूर्व सरकारों ने महिलाओं के अधिकार छीन लिए थे। उन्हें कभी भी आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर नहीं दिए गए और उनके साथ अन्याय किया गया लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शासनकाल में महिलाओं को सम्मान और सही अवसर मिला है। सरकार द्वारा अवसर प्रदान किए जाने पर महिलाएं अपने ज्ञान और प्रतिभा के दम पर नए कीर्तिमान बना रही हैं। इसके लिए पूरी मातृशक्ति मोदी सरकार की आभारी है।
केंद्र का फैसला महिलाओं के लिए खुशी की बात
डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव आजाद पार्टी की प्रदेश महासचिव एवं गांव जराई सरपंच अराधना अंदौत्रा ने कहा कि सरकार का यह फैसला स्वागत योग्य है। महिलाएं पिछले लंबे समय से अपने अधिकारों से वंचित रहीं। अब तक महिलाओं को उनका अधिकार नहीं दिया गया। अब अगर महिलाओं को उनके अधिकार मिले हैं तो इस फैसले का स्वागत किया जाना चाहिए। यह महिलाओं के लिए खुशी की बात है। इससे खुशी की बात कोई और नहीं हो सकती।
सुर्खियां बटोरने का काम कर रही भाजपा
कांग्रेस की प्रदेश सचिव काजल राजपूत का कहना है कि पुरुष प्रधान समाज में आरक्षण महिलाओं का अधिकार है। इसे लागू करने के बाद ही इसका प्रचार करना चाहिए। केवल सुर्खियां बटोरने या चुनाव से पहले महिलाओं को भ्रमित करने के लिहाज से आरक्षण का ढोल पीटना सही नहीं है। पड़ोसी राज्य पंजाब की तर्ज पर जम्मू-कश्मीर में भी महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण दिया जाना चाहिए। अगर केंद्र सरकार इसे लागू करने की इच्छा रखती है तो इसे तुरंत लागू किया जाना चाहिए। भाजपा चाहती है कि इस विधेयक को चुनाव से ठीक पहले लागू कर इसका राजनीतिक फायदा लिया जा सके। महिलाओं को हमेशा बेवकूफ बनाने वाली सरकार का तब तक विश्वास नहीं किया जा सकता, जब तक यह विधेयक कानून नहीं बन जाता।