कठुआ। उधमपुर संसदीय सीट के अस्तित्व में आने के 52 वर्ष बाद भी महिला प्रत्याशी इस सीट पर खाता नहीं खोल पाई हैं। ऐसा नहीं कि इस सीट पर महिला प्रत्याशियों ने दावेदारी नहीं की। 1967 से लेकर 2019 तक हुए 13 लोकसभा चुनावों में सात महिला प्रत्याशियों ने अपनी किस्मत आजमाई, लेकिन एक भी महिला प्रत्याशी अपनी जमानत बचाने में नाकाम रही है। इन 52 वर्षों के दौरान 187 पुरुष उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतर चुके हैं। इस सीट पर एकतरफ जहां चुनाव लड़ने में महिलाओं ने उदासीनता दिखाई है। वहीं, राजनीतिक पार्टियों ने भी महिलाओं को उम्मीदवार बनाने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। महिलाओं को उम्मीदवार बनाने में भाजपा, कांग्रेस के अलावा क्षेत्रीय दल भी इस मामले में पहल नहीं कर पाए हैं। हालांकि, शिवसेना, समाजवादी पार्टी और भारतीय बहुजन पार्टी ने एक-एक बार इस सीट से महिला प्रत्याशियों को उतारा। जबकि, महिला प्रत्याशियों ने बतौर निर्दलीय भी चुनाव लड़ा, लेकिन इनमें से कोई भी बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाई।
1996 में सबसे अधिक तीन महिलाओं ने आजमाया था भाग्य
बता दें, 1996 का चुनाव उधमपुर लोकसभा में इतिहास बन गया था। इस दौरान कुल 40 उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतरे थे। इनमें अब तक सबसे अधिक तीन महिला प्रत्याशी भी शामिल थीं। तीनों ने बतौर निर्दलीय दावेदारी जताई। हालांकि, इनमें से कोई महिला उम्मीदवार 800 से अधिक मत हासिल नहीं कर पाई। इस दौरान इंद्रा रानी को 737, शीला देवी को 652 और कृष्णा देवी को महज 190 वोट मिले, जोकि, महिला प्रत्याशियों को इस सीट पर मिले अब तक के सबसे कम वोट हैं।
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महिला उम्मीदवारों को अब तक
दो हजार से अधिक नहीं मिले मत
उधमपुर संसदीय सीट का इतिहास इस तरह का है कि इस सीट पर आज तक चुनाव मैदान में उतरी कोई भी महिला प्रत्याशी दो हजार वोट हासिल नहीं कर पाई है। हालांकि, 2009 में भारतीय बहुजन पार्टी की टिकट पर चुनावी रण में उतरीं कंचन शर्मा को अब तक के सर्वाधिक 1985 वोट मिले। जबकि, 2014 में समाजवादी के चुनाव निशान पर चुनाव मैदान में उतरीं अमृतवर्षा को 1842 और 2019 में शिवसेना प्रत्याशी मीनाक्षी को 1660 वोट मिले।
1989 में राणो देवी ने पहली बार लड़ा था उधमपुर से चुनाव
बता दें, 1967 के बाद 1984 तक किसी महिला प्रत्याशी ने इस सीट से चुनाव नहीं लड़ा। 17 साल के दौरान हुए पांच चुनाव में एक भी महिला प्रत्याशी इस सीट से नहीं लड़ी। लेकिन 1989 में पहली बार राणो देवी देवी ने बतौर निर्दलीय इस सीट से चुनाव लड़ा। इस चुनाव में 24 प्रत्याशी चुनावी रण में थे। राणो देवी देवी ने इस चुनाव में आठ प्रत्याशियों को पीछे छोड़ दिया। हालांकि, राणो देवी देवी को इस चुनाव में 0.1 फीसदी की दर से 430 वोट ही मिले। इस चुनाव में वह 16वें नंबर पर रहीं। इसके बाद 1996 में हुए चुनाव में तीन महिला प्रत्याशी इस संसदीय सीट पर चुनाव लड़ीं, लेकिन किसी की जमानत नहीं बची। उसके बाद 2009 से 2019 के बीच तीन महिला प्रत्याशी इस लोकसभा सीट से चुनाव लड़ चुकी हैं।