कठुआ। स्थापना के 20 साल बाद भी प्राइमरी स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) खरोट डिस्पेंसरी की पुरानी इमारत में चल रहा है। हालात यह हैं कि एक ही कमरे से तीन चिकित्सा अधिकारी अलग-अलग समय में मरीजों का इलाज कर रहे हैं। नौ स्टाफ सदस्यों के बैठने के लिए पर्याप्त जगह नहीं है। गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण और डेंटल चेयर भी एक ही कमरे में स्थापित है।
खरोट गांव की पांच हजार की आबादी को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा प्रदान करने के लिए वर्ष 2014-15 में पीएचसी के लिए एक नई इमारत बनाने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। लगभग 1.63 करोड़ की लागत से वर्ष 2020 में पीएचसी की नई इमारत तो बनाई गई, लेकिन कभी उस नई इमारत में पीएचसी को स्थानांतरित नहीं किया गया।
नई इमारत बिना सेवाएं प्रदान किए ही खंडहर हो गई। वास्तव में कोरोना काल में जिला प्रशासन ने इस नई बनी इमारत में क्वाइरनटाइन सेंटर बना दिया था जिससे पूरी इमारत बदहाल हो गई है। सूत्रों की मानें तो बदहाल इमारत को पीएचसी लायक बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग को 50 लाख की अतिरिक्त राशि की जरूरत पड़ेगी।