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Kathua News: लगे कचरे के ढेर, मक्खी-मच्छरों के बढ़ते प्रकोप से लोग चिंतित

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शहर के कालेज रोड पर लगा कचरे का ढेर, जिसे खत्म करने के आग से जला दिया गया। संवाद
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24 दिन से जारी सफाई कर्मचारियों की हड़ताल से शहर में गहराया स्वच्छता संकट
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संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। नगर परिषद के सफाई कर्मचारियों की पिछले 24 दिनों से जारी हड़ताल का असर अब शहर की स्वच्छता व्यवस्था पर गंभीर रूप से दिखाई देने लगा है। शहर के विभिन्न बाजारों, रिहायशी क्षेत्रों और सार्वजनिक स्थलों पर कचरे के बड़े-बड़े ढेर जमा हो गए हैं। इससे न केवल लोगों को दुर्गंध और गंदगी का सामना करना पड़ रहा है बल्कि मक्खी-मच्छरों के बढ़ते प्रकोप के कारण संक्रामक बीमारियों का भी खतरा बढ़ गया है। यदि जल्द ही कोई समाधान नहीं निकाला गया तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।

जानकारी के अनुसार, शहर से प्रतिदिन लगभग 40 टन कचरा निकलता है। सामान्य दिनों में नगर परिषद के सफाई कर्मचारी इस कचरे का नियमित रूप से संग्रहण और निस्तारण करते हैं, लेकिन हड़ताल के कारण पिछले तीन सप्ताह से अधिक समय से कचरा उठान कार्य प्रभावित है। परिणामस्वरूप, शहर के प्रमुख बाजारों, गलियों, मोहल्लों तथा सार्वजनिक स्थलों पर कचरे के ढेर जमा हो गए हैं। गर्मी के मौसम में सड़ता हुआ कचरा दुर्गंध फैलाने के साथ-साथ मक्खियों और मच्छरों के लिए भी अनुकूल वातावरण तैयार कर रहा है।
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हालत यह है कि शहर में खाद्य सामग्री की दुकानों के पास कचरे के ढेर लगे हुए हैं। दुकानदारों और ग्राहकों का कहना है कि कचरे पर मंडराने वाली मक्खियां खाद्य पदार्थों को दूषित कर सकती हैं, जिससे पेट संबंधी बीमारियों सहित संक्रमण फैलने की आशंका बनी हुई है। लोगों का कहना है कि लंबे समय तक कचरा जमा रहने से सार्वजनिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है और प्रशासन को तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए।

सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य संजीव वैध ने कहा कि खुले में कचरा जलाना समस्या का समाधान नहीं है। उन्होंने कहा कि प्लास्टिक और अन्य अपशिष्ट पदार्थों के जलने से वातावरण में विषैली गैसें फैलती हैं। उन्होंने प्रशासन से कचरे के सुरक्षित निस्तारण की व्यवस्था करने की मांग की। इस बीच सफाई कर्मचारी यूनियन भी अपनी मांगों को लेकर आंदोलन पर डटी हुई है। यूनियन के प्रधान शाका शुभ ने कहा कि वे अपनी जायज मांगों को लेकर संघर्ष करने के लिए मजबूर हैं। बताया कि शुक्रवार को मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला इस मामले में निर्णय लेने वाले हैं। यदि सरकार का फैसला कर्मचारियों के हित में नहीं आया तो आंदोलन उग्र रूप भी धारण कर सकता है।
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जिला मलेरिया अधिकारी सोहन लाल के अनुसार, 2025 के दौरान कठुआ जिले में डेंगू के कुल 901 मामले दर्ज किए गए थे, जिनमें से 432 मामले शहरी क्षेत्रों से सामने आए थे। इसके अलावा, मलेरिया का भी एक मामला रिपोर्ट हुआ था। उन्होंने बताया कि वेक्टर जनित रोगों की रोकथाम के लिए विभाग की 10 टीमें लगातार जागरुकता अभियान चला रही है। 25 अप्रैल से मलेरिया और 16 मई से डेंगू के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए टीमें शहर और आसपास के गांवों में घर-घर जाकर सफाई व्यवस्था बनाए रखने, पानी जमा न होने देने तथा मच्छरों से बचाव के उपायों की जानकारी दे रही है। स्वास्थ्य विभाग ने पांच जून को नगर परिषद को पत्र लिखकर कचरे के निस्तारण और स्वच्छता व्यवस्था बहाल करने के लिए आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया था।
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