भारतीय सीमा में घुसपैठ कर आए आतंकियों के नए दल में स्नाइपर भी शामिल हैं। इनकी मुख्य भूमिका घात लगाकर हमला करने की होती है। आईएसआई द्वारा इन्हें टेलीस्कोपिक साइट से लैस एम4 कारबाइन दी जाती है, जिसे अत्यंत घातक माना जाता है।सुरक्षा बलों पर लंबी दूरी से हमला करने या काफिलों को निशाना बनाने के लिए स्नाइपर राइफलों का इस्तेमाल किया जाता है।
पहले पाकिस्तानी सेना और रेंजर्स अंतरराष्ट्रीय सीमा के पार स्नाइपर तैनात रखते थे। कई बार बीएसएफ जवानों को भी स्नाइपिंग का शिकार बनाया गया, लेकिन अब पाकिस्तान ने अपनी रणनीति बदलते हुए स्नाइपरों को घुसपैठ कराना शुरू कर दिया है।पिछले एक साल में बदनोटा हमले से लेकर कोहग मुठभेड़ और खडांरा टॉप की घटना में मारे गए आतंकियों के पास से टेलीस्कोपिक साइट वाली एम4 कारबाइन बरामद हुई हैं।
इनके मोबाइल फोन से प्राप्त तस्वीरों में अन्य आतंकियों को भी इसी प्रकार के हथियारों से लैस देखा जा सकता है। सुफैन के अंबे नाला क्षेत्र में हुई मुठभेड़ में मारे गए एक आतंकी से भी क्षतिग्रस्त एम4 कारबाइन और टेलीस्कोपिक साइट बरामद हुई है। यह स्पष्ट संकेत है कि उसे सुरक्षा बलों पर दूर से घात लगाकर हमला करने के लिए विशेष प्रशिक्षण देकर भेजा गया था।