ऋण राशि चुकाने के साथ-साथ सोने की शुद्धता संबंधी दिशानिर्देश का भी किया उल्लंघन
कठुआ। प्रधान जिला न्यायाधीश जतिंदर सिंह जमवाल ने यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की ओर से दाखिल सोने के ऋण वसूली याचिका में निर्णायक फैसला सुनाया। इस मामले में बैंक ने आरोप लगाया कि आरोपी लक्की ने सोने के ऋण के तहत एक लाख अस्सी हजार रुपये प्राप्त किए थे और ऋण राशि चुकाने के साथ-साथ जमा किए गए सोने की शुद्धता संबंधी दिशानिर्देशों का भी उल्लंघन किया।
न्यायालय ने आदेश दिया है कि लकी को कुल 3,09,790 रुपये (जिसमें 30 नवंबर 2020 तक के ब्याज सहित) का भुगतान करना होगा। साथ ही इस राशि पर 30 नवंबर 2020 से लेकर पूर्ण भुगतान तक 10 प्रतिशत वार्षिक ब्याज जोड़ दिया जाएगा और अतिरिक्त लागत भी वसूली जाएगी।
बकाया राशि का आंकड़ा बैंक के लेखा विवरण और शाखा प्रबंधक दीपक कुमार और उप-शाखा प्रबंधक/ऋण अधिकारी रितिका शर्मा की ओर से दी गई गवाही से साबित हुआ। बैंक ने यह भी कहा कि आरोपी द्वारा उपलब्ध कराए गए सोने को जांच में अपूर्ण या अशुद्ध पाया गया, जिस कारण बैंक ने संबंधित मूल्यांकन के पश्चात सीबीआई में शिकायत दर्ज कराई। आपराधिक नोटिस के बावजूद आरोपी ने न तो कोई जवाब दिया और न ही अदालत में उपस्थित हुआ। इसके चलते एक्सपर्टी कार्यवाही की गई। यह मामला वित्तीय प्रतिष्ठानों में पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।