कभी रंजीत सागर झील के किनारे बसने वाले ग्रामीण एक बार फिर अपने पुराने दिनों को याद करेेंगे। हर वर्ष चैत्र कृष्ण की चतुर्दशी को यहां रावी नदी के किनारे सांस्कृतिक मेला लगा है। पिछले चार वर्षों की तरह इस बार भी कोठी गांव में बुधवार को मेले का आयोजन किया जा रहा है।
रंजीत सागर झील बनने से पंद्रह वर्ष पहले कोठी, क्याला, दनी आदि गांवों के हजारों लोगों को यहां से विस्थापित होना पड़ा था। राज्य सरकार को यहां रावी नदी पर झील बनानी थी। विस्थापन के बाद राज्य सरकार की ओर से ग्रामीणों के लिए पुनर्वास की ठोस नीति नहीं बनाई गई, इसके कारण सभी ग्रामीणों को अलग-अलग क्षेत्रों में बसना पड़ा था। गांवों के हजारों लोग इधर-उधर छितरा गए। अपनों और अपने समाज से लोग इधर-उधर हो गए।
विस्थापन से पहले रावी के किनारे सदियों से चतुर्दशी मेला लगता था। इसके पूरे क्षेत्र के ग्रामीण उत्साह से हिस्सा लेते थे। विस्थापन के साथ यह मेला भी अतीत के गर्त में समा गया।
विस्थापित लोग अपनी जिंदगी को फिर से पटरी पर लाने की कोशिश में लग गए। इस सबके बीच मेला छूट गया, लेकिन लोगों के दिल में उस सांस्कृतिक मेले की भूली बिसरी यादें जिंदी बनी रहीं। उन्हीं पुरानी रस्मों, रीति-रिवाजों और संस्कृति को आक्सीजन देने की पहल चार वर्ष पहले की गई। विस्थापित ग्रामीणों ने मेले को फिर से जिंदा करने की ठानी।
पिछले चार वर्ष से रावी के किनारे कोठी गांव में चैत्र कृष्ण चतुर्दशी को मेला आयोजित किया जाने लगा। बांध विस्थापित मेला लगने के साथ लोगों को विस्थापन के दिन याद आ जाते हैं। भूले-बिसरे लोग मेले में आकर एक-दूसरे के गले मिलते हैं।
रस्मों को निभाते हैं और सुखदुख बयां करते हैं। मेले के आयोजक रघुवीर सिंह और धर्म सिंह ने बताया कि राज्य सरकार के मंत्री चौधरी लाल सिंह मेले के उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि होंगे। मेले में मशहूर लोक गायक लेखराज वर्मा अपनी टीम के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश करेंगे।