कठुआ। मतदाताओं ने नोटा (उपरोक्त में से कोई नहीं) का भी इस्तेमाल अच्छी खासी संख्या में किया है। कई विधानसभा क्षेत्रों में तो नोटा को प्रदेश की क्षेत्रीय पार्टी पीडीपी से भी ज्यादा मत मिले हैं।
धारा 370 के निरस्तीकरण के बाद जिले में पहली बार हो रहे विधानसभा चुनाव में सबसे ज्यादा नोटा का इस्तेमाल कठुआ अनुसूचित जाति आरक्षित सीट से किया गया है। इसमें कुल 733 मतदाताओं ने उपरोक्त में से कोई नहीं पर ईवीएम का बटन दबाया है। बिलावर विधानसभा में दूसरे सबसे ज्यादा 525 मतदाताओं ने नोटा का प्रयोग किया है। वहीं, जसरोटा विधानसभा में 456, बनी में 427, हीरानगर में 321 और बसोहली में सबसे कम 246 मतदाताओं ने नोटा का बटन दबाकर राजनीतिक पार्टियों और निर्दलीय उम्मीदवारों से अपनी असहमति जाहिर की है।
विधानसभा क्षेत्रों में पहाड़ी उपमंडल की बनी सीट पर क्षेत्रीय पार्टी पीडीपी और निर्दलीय उम्मीदवारों से ज्यादा वोट लेकर नोटा छठे स्थान पर रहा। वहीं, बिलावर में चार कुल उम्मीदवारों में नोटा को चौथा स्थान मिला है, जबकि पीडीपी प्रत्याशी को सिर्फ कुल 309 मत मिले हैं। वहीं, बसोहली में चार उम्मीदवारों के मुकाबले नोटा पांचवें स्थान पर रहा, जबकि विधानसभा परिसीमन के बाद पहली बार बनी जसरोटा विधानसभा में कुल आठ प्रत्याशियों के मुकाबले 456 मतों के साथ सातवें स्थान मिला। इसमें पीडीपी और शिव सेना (उद्धव) को सिर्फ 142 और 104 मत मिले हैं। हीरानगर में नोटा 321 मतों के साथ पांचवें स्थान पर रहा और पीडीपी के प्रत्याशी को कुल 207 मत ही मिले हैं।