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Kathua News: धान खरीद केंद्रों में भारी अव्यवस्था, मंडी में पहुंचकर पछता रहे किसान

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-बैठने व पानी की व्यवस्था नहीं, मौसम के खराब होने की स्थिति में फसल को बचाने के पर्याप्त तिरपाल भी नहीं
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संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। जिले में धान की खरीद करने के लिए खोली गई मंडियों में फसल के तौल का काम शुरू हो गया है लेकिन किसान संगठनों ने यहां व्याप्त अव्यवस्था के खिलाफ आवाज उठानी शुरू कर दी है। वहीं, न्यूनतम समर्थन मूल्य पाने की आस में अपनी फसल को मंडी पहुंचाने वाले किसान इसे अपनी सबसे बड़ी भूल बता रहे हैं।
बता दें कि जिले में किसानों की सुविधा के लिए कृषि विभाग द्वारा भारतीय खाद्य निगम के सहयोग से कुल 11 मंडियों की व्यवस्था इस बार की गई है। विभाग के अनुसार इनमें से नौ मंडियों को शुरू कर दिया गया है, जबकि पहाड़ी क्षेत्र में पड़ने वाली दो मंडियों को उस इलाके में फसल के तैयार होने पर खोले जाने के दावे किए गए हैं। यहां आने वाले किसानों को बैठने की व्यवस्था, पानी की व्यवस्था, मौसम के खराब होने की स्थिति में फसल को बचाने के पर्याप्त तिरपाल की व्यवस्था किए जाने की बात कही गई है लेकिन मंडी में आने वाले किसानों की माने तो वहां ऐसी को सुविधा उपलब्ध नही है।
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जराई से भजवाल खरीद मंडी में अपनी फसल लेकर आने वाले किसान केवल सिंह का कहना है कि उनका फसल को सरकारी मंडी में बेचने का फैसला पूरी तरह से गलत था। क्योंकि मंडी में खरीद की प्रक्रिया ही इतनी जटिल है जो किसानों को यहां आने से रोक रही है। उन्हें खुद अपनी फसल को लाए हुए चार दिन हो चुके हैं। एक तो यहां किसान से खरीदे जाने वाले धान के नाम पर 70 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से सफाई व अन्य कामों के नाम पर पैसे लिए जा रहा है, जबकि 50 रुपये दाम तय है। कृषि विभाग और भारतीय खाद्य निगम के कर्मचारियों की मौजूदगी के बावजूद किसानों से इस तरह की वसूली इनकी मिलीभगत को ही इंगित करती है जो किसान को मंडी की व्यवस्था में विमुख करती है।

किसान संगठनों ने मंडी से किसानों से लूट का आरोप लगाया, डीसी कार्यालय पहुंचे

जिले में खोले गए धान खरीद केंद्रों में व्याप्त अनियमितताओं पर जम्मू-कश्मीर किसान तहरीक ने कड़ा संज्ञान लिया है। मंगलवार को किसान संगठन की नेताओं ने डीसी कठुआ डॉ. राकेश मिन्हास से मिलकर खरीद केंद्र में किसानों के साथ हो रही लूट के बारे में बताया और इसे बंद कराने की मांग की।
शिष्टमंडल का नेतृत्व कर रहे जिला सचिव सेवाराम डीसी को बताया कि खरीद केंद्रों में किसानों से तौल करते समय डेढ़ से दो किलो प्रति क्विंटल ज्यादा धान लिया जा रहा है। जबकि सफाई के लिए लिया जाने वाले 50 रुपये प्रति क्विंटल की जगह कहीं 70 तो कहीं 80 रुपये लिए जा रहे हैं जो सिर्फ किसानों के साथ हो रही लूट के सिवा और कुछ नहीं है। हैरानी की बात है कि यह सब कृषि विभाग और भारतीय खाद्य निगम के कर्मचारियों के सामने किया जा रहा है।
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वहीं, शिष्टमंडल में शामिल हरि सिंह ने डीसी को बताया कि खरीद केंद्रों में आधारभूत सुविधाएं नहीं हैं और न ही वहां पर खरीद को सही तरीके से संचालित करने के लिए पर्याप्त व्यवस्था है। खरीद केंद्र में न तो धान की सफाई के लिए पर्याप्त पंखे हैं और न ही फसल को बचाने के लिए कोई इंतजाम। लिहाजा इस पर कड़ा संज्ञान लेने की जरूरत है। किसान नेताओं की समस्या सुनने के बाद डीसी ने उन्हें आश्वासन दिया की सारी शिकायतें जल्द हल कर दी जाएगी और खरीद केंद्रों में ऐसी व्यवस्था की जाएगी कि भविष्य में किसानों को किसी तरह की समस्या ना आए। इस मौके पर लालचंद, झंकार चंद, धर्मपाल, ओंकार चंद, बोधराज, धर्म सिंह मनोहर लाल आदि किसान नेता मौजूद रहे।
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