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Kathua News: नौ मेगावाट की सेवा तीन परियोजना को अवैध खनन से खतरा

Wed, 18 Jun 2025 01:39 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
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कठुआ जिले में जम्मू और हिमाचल की सीमा पर बना सेवा चरण तीन परियोजना का बांध।
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कठुआ। सेवा नदी से रेत, बजरी आदि खनिजों के अवैध खनन से सेवा चरण तीन जलविद्युत परियोजना को खतरा हो गया है। इसलिए जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। इसके तहत परियोजना के पास खनन गतिविधियों पर तत्काल प्रभाव से पूर्ण प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी किया है। यह परियोजना बसोहली सब डिवीजन के माश्का इलाके में हिमाचल और जम्मू कश्मीर की सीमा पर स्थित है।
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प्रशासन के अनुसार कुछ असामाजिक तत्व, पत्थर विक्रेता और क्रशर मालिक सेवा नदी आदि सहित अन्य नदी, नालों से रेत, बजरी जैसे खनिजों की अवैध खोदाई कर रहे हैं। इसके परिणामस्वरूप नदी तल से करीब 3-4 मीटर तक गहराई में भूकटाव हो चुका है, जिससे सेवा चरण तीन जलविद्युत परियोजना की नींव और संरचना को गंभीर क्षति पहुंच रही है।


उपायुक्त डॉ. राकेश मिन्हास ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग करते हुए सेवा नदी के सेवा-चरण तीन परियोजना से दो किमी ऊपर और चार किमी नीचे तक क्षेत्र में किसी भी प्रकार के खनन कार्य पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया है। ऐसे में अब किसी भी व्यक्ति, वाहन या मशीन को वहां से रेत, बजरी या अन्य खनिज निकालने की अनुमति नहीं होगी।
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आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि इस आदेश के कार्यान्वयन के लिए बसोहली के अतिरिक्त उपायुक्त जिम्मेदार होंगे। वह प्रत्येक सोमवार को निर्धारित प्रारूप में निगरानी रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे। रिपोर्ट में पकड़े गए वाहनों की जानकारी, उनके पंजीकरण नंबर, चेसिस नंबर और लगाए गए जुर्माने का विवरण शामिल होगा।




12 साल से ठप है सेवा तीन परियोजना, कबाड़ बन रहीं मशीनें, इमारत खंडहर
सेवा तीन जलविद्युत परियोजना पिछले 12 साल से ठप है। इससे राज्य सरकार को करोड़ों रुपये का नुकसान झेलना पड़ा है। नौ मेगावाट बिजली उत्पादन क्षमता वाली यह परियोजना सरकार की अनदेखी का शिकार है। इस कारण वहां लगी टरबान समेत बिजली घर की मशीनरी भी खराब हो चुकी है। हाल के वर्षों में इस परियोजना पर सात से आठ करोड़ रुपये खर्च करने के बावजूद बिजली का उत्पादन शुरू नहीं हो सका। नई मशीनरी के लिए आईआईटी रुड़की के माध्यम से 15 करोड़ रुपये की डीपीआर बनाकर प्रदेश प्रशासन को भेजी गई थी। मंजूरी के अभाव में यह डीपीआर भी सचिवालय में धूल फांक रही है लेकिन जम्मू कश्मीर में नई सरकार गठन के बाद इस परियोजना के जीर्णोद्धार की उम्मीद है।
इसके लिए रुड़की के विशेषज्ञों की टीम ने सेवा तीन परियोजना को हुए नुकसान वाले स्थल का निरीक्षण भी किया था। कई साल पहले नहर की मरम्मत हो चुकी है लेकिन बड़ी मरम्मत के बिना टरबाइन से बिजली उत्पादन नहीं हो सकता। परियोजना से जुड़े पूर्व अधिकारियों के अनुसार सरकारी उदासीनता ने इस परियोजना की टरबाइनों को कबाड़ और इमारत को खंडहर में बदल दिया है। यहां स्टाफ नियुक्त है लेकिन काम कुछ भी नहीं होता।



रोजाना लग रही लाखों की चपत

रावी दरिया से सटे माश्का गांव में स्थित सेवा तीन विद्युत परियोजना की क्षमता नौ मेगावाट है। जम्मू कश्मीर स्टेट पावर डेवलपमेंट काॅरपोरेशन ने इस परियोजना को वर्ष 2002 में बनाया था। यहां पूरी क्षमता से कभी बिजली नहीं बनी। यह परियोजना सामान्य तौर पर रोजाना 50 से 60 हजार यूनिट तक बिजली पैदा करती रही है। ऐसे में रोजाना पैदा होने वाली बिजली का मूल्य एक लाख रुपये से अधिक है। पिछले 12 साल से परियोजना एक यूनिट बिजली भी पैदा नहीं कर पाई है। रावी दरिया के पानी को परियोजना स्थल तक पहुंचाने के लिए 2.89 किमी लंबी नहर बनाई गई है। इसी नहर से सटी सड़क का 200 मीटर हिस्सा धंसकर रावी दरिया में समा चुका था। इसकी मरम्मत होने के बावजूद परियोजना नहीं चल सकी जबकि वहां बिजली उत्पादन होने से आसपास के क्षेत्र को रोशन करने के लिए प्रदेश सरकार को नौ मेगावाट तक बिजली मिल सकती थी।
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