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Kathua News: बसोहली का नीलकंठ महादेव मंदिर, जहां कभी शिवलिंग में दिखता था पूर्व जन्म

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मंदिर में स्थापित ​शिवलिंग। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। बसोहली जहां अपनी संस्कृति, कला और पुरातन इमारतों के लिए प्रसिद्ध है, वहीं क्षेत्रवासियों की धर्म के प्रति भी काफी आस्था है। यहां पर बहुत से प्राचीन मंदिर हैं। उन्हीं में से एक है नीलकंठ महादेव मंदिर। मान्यताओं के अनुसार इस मंदिर में मोती के रूप में शिवलिंग स्थापित है, जिसमें प्राचीन समय में पूर्व जन्म दिखता था।
वैसे तो नीलकंठ महादेव मंदिर में हर दिन पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं का आना लगा रहता है। लेकिन शिवरात्रि और सावन में श्रद्धालुओं की आस्था देखते ही बनती है। दंतकथाओं के अनुसार रामलीला मैदान से सटा नीलकंठ महादेव मंदिर सदियों पुराना है। मंदिर में स्थापित शिवलिंग एक योद्धा का बाजूबंद मोती है। कहा जाता है कि युद्ध के दौरान किसी योद्धा का का बाजू कट गया था, जिसे चील उठा कर ले जा रही थी। इसी बीच वह एक कुएं में गिर गया था।
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इस पर सफेद मोती लगा था जो कई वर्ष बाद एक महिला को कुएं से पानी निकालने के दौरान मिला। इस बाजूबंद को राजा ने मसौड़ी शांति घाट के समीप एक शिवलिंग के रूप में स्थापित करवाया था। कहा जाता है कि इस शिवलिंग में अपना पूर्व जन्म साफ देखा जा सकता था।
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एक दिन रानी ने शिवलिंग दर्शन के बाद उसमें अपने पूर्व जन्म को देख लिया। उसमें पता चला कि वह पूर्व जन्म में बंदरिया थी। क्रोधित होकर उसने सफेद रंग के मोती स्वरूप शिवलिंग को आग में डाल दिया, जिससे वह काला हो गया। जिससे इसमें दरार आ गई। आज भी इस शिवलिंग पर आई दरार को साफ देखा जा सकता है।
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