हीरानगर। सीमावर्ती इलाकों में मोबाइल नेटवर्क की समस्या के चलते बच्चों की ऑनलाइन शिक्षा सही ढंग से नहीं हो पा रही है। इसे लेकर अभिभावक बेहद चिंतित हैं। कई बार टेलीकॉम कंपनियों और प्रशासनिक अधिकारियों से मांग करने के बावजूद भी बेहतर नेटवर्क की व्यवस्था नहीं हो पाई है।
सरपंच विनय शर्मा ने कहा कि सीमावर्ती इलाकों के बच्चों की शिक्षा के लिए सरकार को विशेष प्रबंध करने चाहिए थे। लेकिन, सरकार ने इन्हें भगवान भरोसे छोड़ दिया। लगभग सभी सीमावर्ती गांवों में मोबाइल नेटवर्क इतना बढ़िया नहीं है कि बच्चे ऑनलाइन क्लास लगा सकें। सरकार को बच्चों के भविष्य की चिंता करते हुए यहां इंटरनेट की व्यवस्था बेहतर करनी चाहिए।
मानियारी के नायब सरपंच कुलदीप वर्मा ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे गांवों में मोबाइल नेटवर्क बेहद घटिया है। यहां इंटरनेट का इस्तेमाल करना तो दूर किसी से बात करने के लिए भी या तो घर से बाहर निकलना पड़ता है, या छत पर चढ़कर बात करनी पड़ती है। पहले यहां गोलाबारी की वजह से बच्चों की शिक्षा प्रभावित होती रही है। अब इंटरनेट की सुविधा न होने के कारण बच्चों की पढ़ाई नहीं हो पा रही है। यही हाल रहा तो बच्चे बाकियों से पिछड़ जाएंगे। कुछ दिन पहले जिला उपायुक्त इलाके के दौरे पर आए थे। इस दौरान भी लोगों ने इस समस्या के बारे में उन्हें जानकारी दी थी।
पूर्व सरपंच राकेश शर्मा ने कहा कि सीमावर्ती लोग हमेशा ही सरकार की अनदेखी का शिकार हुए हैं। गोलियों के साए में रहने वाले लोगों के लिए न तो शिक्षा की कोई बेहतर व्यवस्था है, और न ही रोजगार की। कोरोना महामारी के चलते सरकार ने ऑनलाइन शिक्षा तो शुरू करा दी, लेकिन सीमावर्ती इलाकों में बच्चे ऑनलाइन कक्षाएं कैसे लगाएंगे? यह किसी ने नहीं सोचा। बहुत से लोगों ने अपने बच्चों को पढ़ाई के लिए अपने रिश्तेदारों के घर भेज दिया है।