जिले में अवैध खनन पर नकेल कसते हुए पंचायतों के माध्यम से वैध खनन की प्रक्रिया जल्द परवान चढ़ने जा रही है। जिले के बनी सब डिवीजन के चांदल और हीरानगर सब डिवीजन के कसबा क्षेत्र में एक-एक हेक्टेयर जमीन चिन्हित कर ली गई है, जहां से यह प्रयोग शुरू होगा। सरकारी राजस्व में इजाफा करने के साथ ही वैध खनन की यह प्रक्रिया इन क्षेत्रों में निर्माण सामग्री की उपलब्धता को तो सुनिश्चित करवाएगी ही, साथ ही पंचायतों की आय के साधन भी बढ़ाएगी।
प्रदेश सरकार ने माइनिंग नियमों में संशोधन करते हुए अगस्त 2020 में शार्ट टर्म माइनिंग के लिए पंचायतों को परमिट देने का फैसला लिया था। इसके बाद प्रदेश के सभी जिलों को पांच-पांच ऐसे क्षेत्र चिन्हित करने को कहा गया था। जिले में चिन्हित बसंतपुर और बसोहली की तीन साइट जहां तकनीकी खामी के चलते रिजेक्ट हो चुकी है, वहीं बनी के चांदल और दियालाचक से सटे कसबा में साइट का चयन कर लिया गया है। अब खनन निदेशालय की ओर से सभी जिला उपायुक्तों और ग्रामीण विकास विभाग को इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने को कहा गया है।
डीएमओ कठुआ देविंद्र सिंह ने बताया कि अगली प्रक्रिया में अब संबंधित बीडीओ की ओर से दो हजार रुपये का डिमांड ड्राफ्ट माइनिंग विभाग के पास जमा करवाना है, जिसके आधार पर फार्म एसटीपी-1 उन्हें भरना है। इसी के आधार पर माइनिंग प्लान तैयार किया जाएगा, जिसे बाद में पर्यावरण क्लीयरेंस हासिल होने के बाद पंचायतें खनन के लिए इस्तेमाल कर सकेंगी। उन्होंने कहा कि बनी में खनन को लेकर कोई भी वैध माइनिंग लीज नहीं है। ऐसे में प्रतिबंध के चलते जहां अवैध खनन की शिकायतें मिलती रही हैं, वहीं लोगों को भी निर्माण सामग्री हासिल करने में दिक्कतें आती हैं। एक हेक्टेयर से कम क्षेत्र की इन माइनिंग लीज पंचायतों को मिलने के बाद इन समस्याओं का समाधान हो पाएगा और प्रदेश सरकार को राजस्व भी हासिल होगा।