उपमंडल की पंचायत भंडार में शहीद भगत अमरनाथ की जयंती श्रद्धा के साथ मनाई गई।
इस अवसर पर गुरु रविदास सभा बनी के अध्यक्ष बचित्र अंबेडकर की अध्यक्षता में विशेष कार्यक्रम आयोजित हुए, जिसमें उनके बलिदान और योगदान को याद किया गया।
बचित्र अंबेडकर ने इस मौके पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि शहीद भगत अमरनाथ को दलित समाज का क्रांतिकारी, समाजवादी और सामाजिक न्याय का सच्चा सेनानी माना जाता है। उन्हें जम्मू-कश्मीर के आंबेडकर के रूप में याद किया जाता है।
इस मौके पर मौजूद जनसमूह ने उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित कर उनके अधूरे सपनों को पूरा करने का संकल्प लिया। वक्ताओं ने कहा कि शहीद भगत अमरनाथ का जन्म 27 सितंबर 1928 को जिला रामबन के बटोटे तहसील के गांव चंपा में मेघ परिवार में हुआ था।
उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने के बाद खुद को समाजसेवा और विशेषकर वंचित वर्गों के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया। बचपन से ही वे शोषित और पीड़ित लोगों की बदहाल स्थिति को लेकर चिंतित रहते थे।
दलित समाज के अधिकारों की लड़ाई में उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई और जम्मू में बाबू परमानंद, बाबू मिल्खी राम, भगत चज्जू राम, पाशोरी लाल और महाशा नर सिंह जैसे नेताओं से जुड़कर आंदोलन को मजबूत किया। 1970 में जब राज्य सरकार ने अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षण लागू करने से इनकार कर दिया तो उन्होंने प्रदेशव्यापी आंदोलन का नेतृत्व किया।
21 मई 1970 को उन्होंने जम्मू के करन पार्क में सिविल सचिवालय के सामने अनशन शुरू किया और इलाज लेने से भी इनकार कर दिया।
लगातार बिगड़ती तबीयत के बाद भी वे अडिग रहे और एक जून 1970 को उन्होंने अपने प्राणों की आहुति दे दी। उनके बलिदान के परिणामस्वरूप जम्मू-कश्मीर में अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षण लागू हुआ और वे आरक्षण के शहीद के नाम से अमर हो गए। वक्ताओं ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में उनके उल्लेखनीय कार्याें को हमेशा याद रखा जाएगा।