संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। जिला न्यायालय परिसर में वैकल्पिक विवाद समाधान (एडीआर) केंद्र में शनिवार को तीसरी राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। लोक अदालत में विभिन्न श्रेणियों के 878 मामलों को आपसी समझौते के लिए रखा गया, जिनमें से 311 मामलों का मौके पर ही सौहार्दपूर्ण ढंग से निपटारा किया गया। इस दौरान कुल 5 करोड़ 24 लाख 99 हजार 727 रुपये की समझौता राशि जारी की गई।
राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष एवं प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश जतिंद्र सिंह जम्वाल के मार्गदर्शन में किया गया। लोक अदालत के सफल संचालन के लिए जिले के विभिन्न न्यायालय परिसरों में आठ पीठों का गठन किया गया। जिला न्यायालय में तीन पीठों ने अलग-अलग मामलों की सुनवाई की गई। पहली पीठ में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश जतिंद्र सिंह जम्वाल और अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रवीन पंडोह शामिल रहे। दूसरी पीठ में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कठुआ अजय शर्मा और विशेष मोबाइल मजिस्ट्रेट अमनदीप कौर ने मामलों की सुनवाई की। तीसरी पीठ में जिला मोबाइल मजिस्ट्रेट (टी) पूनम गुप्ता और मुंसिफ/जेएमआईसी वीरेन मगोत्रा शामिल रहे।
वहीं बिलावर में चौथी पीठ का संचालन मुंसिफ प्रशांत कुमार ने किया। हीरानगर में पांचवीं पीठ में मुंसिफ लक्ष्य बडयाल और अधिवक्ता नरेश गुप्ता, महानपुर में छठी पीठ में मुंसिफ कंगना गुप्ता और अधिवक्ता दीप कुमार, बसोहली में सातवीं पीठ में मुंसिफ भानु भसीन और अधिवक्ता नवनीश मिश्रा, जबकि बनी में आठवीं पीठ में मुंसिफ शिवानी अत्री और अधिवक्ता पीके बबर शामिल रहे। लोक अदालत के माध्यम से पक्षकारों को लंबे समय तक चलने वाली न्यायिक प्रक्रिया से राहत मिली और कई मामलों का आपसी सहमति से समाधान संभव हो सका। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की इस पहल ने एक बार फिर वैकल्पिक विवाद समाधान प्रणाली की उपयोगिता को साबित किया। अधिकारियों ने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत का उद्देश्य लोगों को त्वरित, सुलभ और कम खर्च में न्याय उपलब्ध कराना है। इस तरह के आयोजन न केवल अदालतों में लंबित मामलों का बोझ कम करते हैं, बल्कि आपसी सहमति और सौहार्द के साथ विवादों के स्थायी समाधान का भी प्रभावी माध्यम बनते हैं।