पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद ने अंतर्राष्ट्रीय सीमा से सटे लोगों को एलओसी की तर्ज आरक्षण देने की मांग की है।
आजाद ने ताज्जुब जताते हुए कहा कि लाइन ऑफ कंट्रोल के लोगों को आरक्षण सहित अन्य विशेष सुविधाएं देने का प्रावधान है लेकिन अंतर्राष्ट्रीय सीमा को यह सुविधाएं नहीं दी जा रहीं हैं।
इसके लिए तत्काल व्यवस्था की जानी चाहिए। हीरानगर सब डिविजन में अंतर्राष्ट्रीय सीमा से विस्थापित ग्रामीणाें की समस्याएं सुनने पहुंचे आजाद ने कहा कि उन्होंने बाकायदा सीमावर्ती ग्रामीणों की मुख्य मांगों को राज्य और केंद्र सरकारों को लिखित में भेज दिया है।
आजाद ने कहा कि सीमावर्ती ग्रामीणों को न्यूनतम पांच मरला भूमि का प्लाट सुरक्षित स्थान पर दिया जाना चाहिए। इसी तरह से ग्रामीण युवाओं के लिए सुरक्षा बलों की भर्ती, तारबंदी के उस पार की भूमि का पूरा और उचित मुआवजा देने, इंसानी आबादी, फसल, संपत्ति और पशु धन का बीमा होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सीमावर्ती इलाकों में फायरिंग से यदि किसी व्यक्ति की मौत होती है तो उसके परिजनों को कम से कम पांच लाख रुपये दिए जाएं। सीमावर्ती ग्रामीणाें को देश के सेवक और नायक करार देते हुए उन्होंने कहा कि सीमा पर तनाव की उथल-पुथल के बावजूद ग्रामीण मेहनतकश जीवन जीते हैं।
अनाज उगाकर देश की सेवा करते हैं। उनका योगदान किसी सुरक्षा बल के जवान से कम नहीं है। ग्रामीणों को संबोधित करते हुए आजाद ने कहा कि इस बार ईद को बाढ़ और बारिश ने फीका कर दिया तो दीवाली पर गोलाबारी का असर है।
इससे पूर्व आजाद ने विस्थापित शिविरों का दौरा कर व्यवस्था का जायजा लिया। हीरानगर सहित छन्न खतरेयां विस्थापित शिविर में ग्रामीणों से बातचीत में उन्होंने समस्याएं सुनीं। इस दौरान आजाद के साथ कांग्रेस जिलाध्यक्ष सुभाष गुप्ता, पूर्व बिजली मंत्री बाबू सिंह सहित कई अन्य नेता, कार्यकर्ता और प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद थे।