तीन दिवसीय बनी छिंज मेले का ढोल-नगाड़ों के साथ पारंपरिक रूप से आगाज
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ/बनी। तीन दिवसीय बनी छिंज मेले का ढोल-नगाड़ों के साथ पारंपरिक रूप से आगाज हो गया। पहले दिन जहां पहाड़ी कल्चर मंच की ओर से रंगारंग कार्यक्रमों की प्रस्तुतियां शुरू करवाई गई। वहीं गोगना परिवार ने छिंज मेले से पहले चादरपोशी की रस्म को अदा किया।
बनी छिंज मेले में दंगल के छोटे मुकाबलों का आगाज वीरवार से होगा और इसके साथ यह मेला अपने पूरे शबाब पर भी रहेगा। इससे पहले बुधवार को रस्म अदायगी के तौर पर स्थानीय पहलवानों के छोटे दंगल गोगना परिवार की ओर से करवाए गए।
वार्षिक परंपरा को निभाते हुए गोगना परिवार के सदस्य शक्ति माता मंदिर में शीश नवाने के बाद चादरपोशी के लिए बनी मेला मैदान की ओर रवाना हुए। पारंपरिक वाद्य यंत्रों की तान ने इलाके में घोषणा कर दी कि बनी मेले का आधिकारिक आगाज हो गया है। मेला मैदान में छिंज का झंडा भी लहरा दिया गया। दोपहर तक श्रद्धालुओं का सैलाब पीर बाबा की मजार पर उमड़ता रहा। मेला मैदान से छिंज कमेटी और गोगना परिवार के सदस्य ढोल-नगाड़ों और जयकारों के साथ मजार पर पहुंचे और पुरानी परंपरा निभाई। इसमें सबसे पहले मक्की की फसल, चुरम चढ़ाकर माथा टेका और मेले की सफलता व क्षेत्र की खुशहाली के लिए दुआ मांगी। शाम को गोगना परिवार ने स्थानीय पहलवानों की छिंज भी करवाई।
गौरतलब है कि स्थानीय प्रशासन और छिंज कमेटी ने इस बार मेले को आकर्षक बनाने के लिए प्रयास किए हैं। वहीं, पहलवानों के लिए भी आकर्षक इनाम देने की भी घोषणा की है। 27 जून तक चलने वाले इस मेले में लगभग 200 पहलवान इस बार भाग लेने जा रहे हैं। इनमें छोटे दंगल के मुकाबले वीरवार और बड़ी माली शुक्रवार को आयोजित की जाएगी। मेला मैदान में रंगारंग प्रस्तुतियों को देखने के लिए सुबह से ही दूर दराज से लोगों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। बनी बाजार में भी मेले के चलते भारी रौनक देखने को मिल रही है। खानपान से लेकर तरह तरह के स्टाल लोगों को आकर्षित कर रहे हैं।
मेले का उद्घाटन डीडीसी बनी रीता ठाकुर और एसडीएम बनी संदीप कुमार शर्मा ने किया। इस अवसर पर पूर्व विधायक मास्टर लालचंद के पुत्र सुनील कुमार ठाकुर विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। वहीं तहसीलदार बनी ने भी उपस्थिति दर्ज करवाई।
मेले के पहले दिन स्थानीय कलाकारों ने रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से समा बांध दिया। पहाड़ी लोकगीतों और पारंपरिक नृत्यों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। हजारों की संख्या में स्थानीय और आसपास के क्षेत्रों से आए लोग मेले का आनंद लेते नजर आए। आयोजकों ने बताया कि यह मेला न सिर्फ सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखने का माध्यम है, बल्कि लोगों को एक साथ जोड़ने का भी एक अनूठा अवसर प्रदान करता है। पहले दिन 15 के लगभग स्थानीय कलाकारों ने दिन में प्रस्तुतियां दीं। वहीं, रात आठ से 11 बजे तक भी रंगारंग कार्यक्रम आयोजित किया गया।