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लखनपुर बस सेवा

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अंतरराज्यीय बसों को जम्मू-कश्मीर में प्रवेश की अनुमति न देने के मामले पर अब बस चालकों ने रावी दरिया पर बने पुल पर आवागमन बंद करने की चेतावनी दे दी है। इससे एक बार फिर से लखनपुर के रास्ते आवागमन करने वालों को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। बुधवार को इस मामले को लेकर यात्रियों ने भी जमकर हंगामा किया था।
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बस चालकों का कहना है कि अगर निजी वाहनों के आने से कोरोना नहीं फैलता है, तो यात्री वाहनों को प्रवेश न दिया जाना केवल उन्हें परेशान करने की नीति है। इसका वह विरोध करते हैं। अगर एक-दो दिनों में इस पर कोई सकारात्मक कदम सरकार की तरफ से नहीं उठाया जाता है, तो मजबूरन कड़ा रुख अख्तियार करना पड़ेगा। लगभग छह हजार लोगों की प्रतिदिन लखनपुर में रैपिड कोरोना जांच के दौरान एक महीने से एक भी मामला पॉजीटिव नहीं पाया गया है।
क्या है मौजूदा स्थिति
कोरोना से बचाव के लिए सरकार के निर्देश के अनुसार किसी भी राज्य से आने वाली बसों को लखनपुर में रोक दिया जा रहा है। यहां से आगे का सफर यात्रियों को रैपिड टेस्ट कराने के बाद ही जम्मू-कश्मीर परिवहन निगम की बसों में करना होता है। हालांकि इस नियम में माता वैष्णो देवी का दर्शन करने आने वाले श्रद्धालुओं को थोड़ी छूट है। उन्हें रैपिड टेस्ट करवाने के बाद अपनी ही बसों से आगे का सफर करने दिया जा रहा है।
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क्यों है विरोध
बस चालक आकाश सिंह की मानें, तो जम्मू से दिल्ली और चंडीगढ़ सहित देश के कई अन्य स्थानों को जाने वाली लंबी रूट की निजी बसों में हजारों की संख्या में लोग सफर करते हैं, जिन्हें अब लखनपुर में रोक दिया जा रहा है। दिल्ली या फिर देश के किसी भी हिस्से से जम्मू के लिए बस यात्रा को प्राथमिकता देने वाले यात्री इस व्यवधान के कारण इन बसों में यात्रा से परहेज कर रहे हैं। इससे अब इन बसों को यात्री कम मिल रहे है।
क्या कहते हैं बस चालक
बस चालक संजय कुमार का कहना है कि कोरोना के कारण हुए लॉकडाउन में करीब छह माह तक बसों को चलने की इजाजत नहीं थी। अनलॉक की प्रक्रिया शुरू होने के बाद बसों को आवागमन करने की अनुमति दी गई। अब पूरे देश में कहीं भी आने जाने पर रोक नहीं है। लेकिन जम्मू-कश्मीर में बाहरी राज्यों की बसों को प्रवेश नहीं करने दिया जा रहा है। विक्की ठाकुर ने कहा कि बाहरी राज्यों की बसों की तो दूर की बात, जम्मू-कश्मीर की पंजीकृत बसों को भी अंदर आने नहीं दिया जा रहा है। बसों को जम्मू में प्रवेश न दिए जाने से इनकी किश्तें भी नहीं निकल रही है। ऐसे में इन बसों से अपने परिवार के लिए रोजी-रोटी कमाने वालों का क्या हाल होगा इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। गारु राम ने भी रोष जताया है।
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