जीएमसी कठुआ के सहायक अस्पताल में जनऔषधि केंद्र के बाहर पसरा सन्नाटा।
- जिले के सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान में मौजूद केंद्र में 200 तरह की दवाएं ही उपलब्ध
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। लोगों को सस्ती दवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से खोले गए प्रधानमंत्री जनऔषधि केंद्र अपनी उपयोगिता सिद्ध नहीं कर पा रहे हैं। जिले के सभी प्रमुख स्वास्थ्य संस्थानों में दवाओं की सीमित उपलब्धता है। ऐसे में मरीज निजी मेडिकल स्टोर से दवाएं खरीदने को मजबूर हैं।
जिसे के सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान की बात करें तो जहां जिले भर से आने वाले मरीजों का दिन-रात जमावड़ा रहता है, वहां खोले गए जनऔषधि केंद्र में करीब 200 तरह की दवाएं ही उपलब्ध हैं। ऐसे में मरीजों के पास निजी मेडिकल स्टोर से दवाएं लेना मजबूरी बना हुआ है। वहीं ऐसा ही हाल जिले के पांच सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में खोल गए जन औषधि केंद्रों में भी है। यहां दवाओं की कमी मरीजों को बाजार से महंगी दरों पर दवाएं खरीदने के लिए मजबूर करती है। इसके उलट शहर के गुज्जर हाॅस्टल के पास निजी संचालक द्वारा खोले गए जन औषधि केंद्र में दवाएं खरीदने के लिए लोगों की भीड़ देखी जा सकती है।
दवा खरीदने पहुंचीं कमलेश देवी ने बताया कि वह शुगर की मरीज हैं। डॉक्टर की लिखी कुछ दवाओं का सेवन पिछले दो सालों से नियमित तौर कर पड़ रहा है। जीएमसी कठुआ में खुले जन औषधि केंद्र में उनकी सभी दवाएं आज तक कभी नहीं मिलीं। जब वह बाजार से अपनी दवाएं खरीदती हैं तो उन्हें महीने की दवा के लिए 750 से 800 रुपये खर्च करने पड़ते हैं। अगर उन्हें ये दवाएं जनऔषधि केंद्र में मिल जाएं तो उसके लिए उन्हें मात्र 185 रुपये ही चुकाने पड़ते हैं।
अपून कुमार का कहना है कि जीएमसी कठुआ में खुले जनऔषधि केंद्र में उन्हें आज तक पता ही नहीं चल पाया कि वहां कौन सी दवा मिलेंगी। क्योंकि जो दवा आज उपलब्ध हैं वह अगले ही दिन आउट आफ स्टाॅक हो जाती हैं। उसे दोबारा आने में कई बार हफ्तों का समय लग जाता है। जिस कारण बीमार व्यक्ति को बाजार में खुले मेडिकल स्टोर से दवाएं खरीदनी ही पड़ती हैं।
जन औषधि केंद्र निजी के संचालक अमित शर्मा की मानें तो उनके पास लगभग हर दवा उपलब्ध है। अगर सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में खुले जन औषधि केंद्र में मरीजों को सभी दवाएं नहीं मिल रही हैं तो यह सीधे तौर पर कमजोर व्यवस्था का परिणाम है, क्योंकि जम्मू में स्थित पीएमबीआई के वेयर हाउस में जनऔषधि केंद्र के माध्यम से बिकने वाली सभी दवाएं उपलब्ध होती हैं। अगर उन्हें वहां से दवाएं मिल रही हैं तो सरकारी जनऔषधि केंद्र में क्यों नहीं पहुंच रहीं।