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Kathua News: नहीं करना पड़ेगा इंतजार, सैंपल देने के कुछ समय बाद मिलेगी रिपोर्ट तैयार

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कठुआ। जिले में मरीजों की सुविधा के लिए जीएमसी के एसोसिएटेड जिला अस्पताल में सुविधाओं को बढ़ाया जा रहा है। तीन दिन पहले जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने क्रिटिकल केयर ब्लॉक का उद्घाटन किया। वहीं, अब जिला अस्पताल में एक छत के नीचे सभी प्रकार की जांच के लिए जिला इंट्रीग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब (डीआईपीएचएल) बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। राज्य स्तरीय टीम जिला अस्पताल परिसर का निरीक्षण कर चुकी है। मुख्य अस्पताल के बगल में लैब के लिए करीब 350 वर्ग मीटर भूमि को चिन्हित किया गया है। इसके लिए डीपीआर तैयार है। प्रस्ताव पास हो चुका है और फंड भी जारी हो गया है। इस लैब में एक जगह पर सभी प्रकार की जांचों की सुविधा होगी। मरीजों को कई स्थानों पर भटकना नहीं पड़ेगा। अधिकारियों ने बताया कि प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत योजना के तहत इस लैब का संचालन किया जाएगा। सरकार की मंशा है कि अस्पतालों में सभी प्रकार की जांच एक छत के नीचे हो, जिससे मरीजों को इधर-उधर भटकना न पड़े। ओपीडी के पास ही लैब की स्थापना की जाएगी। जीएमसी प्रबंधन के मुताबिक जिला अस्पताल में प्रत्येक दिन एक हजार से अधिक मरीज इलाज कराने आते हैं। इनमें 300 मरीजों को जांच कराने की जरूरत पड़ती है।
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24 घंटे रहेगी जांच की सुविधा, उसी दिन मिलेगी रिपोर्ट
जीएमसी प्रबंधन का कहना है कि इंट्रीग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब शुरू होने के बाद संचारी और गैर संचारी रोगों से जुड़ी जांच सप्ताह के सातों दिन 24 घंटे होगी। इससे पहले कई टेस्ट ऐसे थे, जिनकी रिपोर्ट अगले दिन मरीज को मिलती थी। अब सैंपल देने के कुछ समय बाद ही रिपोर्ट मरीज के हाथ में होगी। इससे उसका इलाज भी समय पर शुरू हो पाएगा। इस प्रयोगशाला में सभी प्रोग्राम के लैब टेक्नीशियन एक ही जगह काम करेंगे।
टीबी समेत संचारी रोगों से जुड़ी जरूरी जांचें होंगी
जिला अस्पताल में पहले भी दो लेबोरेटरी चल रही हैं लेकिन यह लैब अत्याधुनिक होगी। लैब शुरू होने के बाद टीबी, मलेरिया और एड्स समेत अन्य पैथोलॉजी, हेमाटालॉजी, सीरोलॉजी, बैक्टीरियोलॉजी, माइक्रोबॉयोलॉजी, बायोकेमिस्ट्री और साइटोलॉजी में होने वाली जांचों के लिए मरीजों को इधर-उधर भटकना नहीं पड़ेगा। इस प्रयोगशाला में 150 से अधिक तरह के टेस्ट किए जा सकेंगे। इसमें लैब टेक्नीशियन, माइक्रो बायोलॉजिस्ट, एक बायोकेमिस्ट के साथ पैथोलाॅजिस्ट की तैनाती की जाएगी। इन्हें पहले ट्रेनिंग दी जाएगी और फिर तैनात किया जाएगा। यहां पर चिकनगुनिया, स्क्रबटाइफस, मलेरिया, एक्ट्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम, कालाजार, डायरिया और टीबी समेत संचारी रोगों से जुड़ी जरूरी जांचें भी होंगी। वहीं, कैंसर, हृदय रोग, मधुमेह, गुर्दा, मोतियाबिंद, अल्जाइमर, आईडीएसपी, आरटीपीसीआर, समेत समेत अन्य सभी गैर संचारी रोगों की महत्वपूर्ण जांच की जाएगी।
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-जीएमसी परिसर में अप्रैल में ही डीआईपीएचएल का निर्माण शुरू हो जाएगा। जो रिपोर्ट पहले अगले दिन मिलती थी। लैब संचालित होने के बाद उसी दिन मिल सकेगी। यहांं अत्याधुनिक मशीनों से जांच होगी। हर तरह का टेस्ट इस लैब में होगा। लोगों को किसी भी तरह के टेस्ट के लिए बाहर जाने की जरूरत नहीं होगी। इसकी डीपीआर बन चुकी है। प्रस्ताव भी पास है और फंड भी जारी कर दिया गया है। -डॉ. सुरिंदर अत्री, प्रिंसिपल, जीएमसी कठुआ
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